PDP-BJP सरकार के कारण J&K में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति तेजी से बिगड़ी – डॉ मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी बाहरी खतरों से निपटने के लिए सेना को खुली छूट थी।

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Former PM Manmohan Singh) का मानना है कि भाजपा सैन्य अभियानों का चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है जो निंदनीय है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार (UPA Government) के कार्यकाल में भी बाहरी खतरों से निपटने के लिए सेना को खुली छूट थी। उस दौरान भी कई सर्जिकल स्ट्राइक हुईं। उन्होंने कहा, हमने सैन्य अभियान भारत विरोधी तत्वों को जवाब देने के लिए किया न कि चुनावी लाभ लेने के लिए।

हिन्दुस्तान टाइम्स की सुनेत्रा चौधरी को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के दिए इंटरव्यू के हाइलाइट्स


लोकसभा चुनाव के अंतिम चरणों के दौरान भाजपा मोदी को सबसे मजबूत प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर रही है। इसे आप किस तरह देखते हैं?

देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना अस्वीकार्य है। सबसे सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलवामा में आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। यह गंभीर खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर विफलता है। तब जब यह सामने आया कि CRPF और BSF सैनिकों को एयरलिफ्ट करने के लिए अनुरोध कर रहे थे लेकिन केंद्र सरकार ने इससे इनकार कर दिया। सरकार ने इस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस से एक आईईडी हमले के बारे में ठोस खुफिया सूचनाओं को भी नजरअंदाज कर दिया, इसके अलावा एक आतंकवादी संगठन की वीडियो चेतावनी पर भी आंखें मूंदे रखी। पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने पंपोर, उरी, पठानकोट, गुरदासपुर, सुंजवान आर्मी कैंप में भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बनाया और यहां तक कि अमरनाथ यात्रा पर भी हमला किया। अवसरवादी पीडीपी-भाजपा सरकार के कारण पिछले पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति तेजी से बिगड़ी है। आपको याद दिला दूं कि हमारी सशस्त्र सेनाओं को हमेशा हर खतरे का जवाब देने के लिए खुली छूट है। पिछले 70 वर्षों में सत्ता में आई सरकार को कभी भी हमारे सशस्त्र बलों की वीरता के पीछे छिपना नहीं पड़ा। हमारी ताकतों के राजनीतिकरण के ऐसे प्रयास शर्मनाक और अस्वीकार्य हैं। यह सब आर्थिक मोर्चे पर नौकरियों, ग्रामीण संकटों पर, एमएसएमई पर मोदी सरकार की अकारण विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के समर्थकों ने यह कहकर आपकी सरकार पर हमला किया कि 26/11 हमले पर आपकी प्रतिक्रिया मजबूत नहीं थी। अगर पीछे मुड़कर देखें तो क्या ऐसा कुछ है जिसपर आपने अलग तरीके से कुछ किया हो?

तथ्यों की अनुपस्थिति में हर कोई अपने हिसाब से इतिहास का आकलन करता है। मैं इससे सहमत नहीं हूं कि हम सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि विभिन्न भू-राजनीतिक परिस्थितियों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता होती है। हमारी प्रतिक्रिया पाकिस्तान को एक आतंकी देश के रूप में अलग-थलग करने और कूटनीतिक रूप से बेनकाब करने की थी। साथ ही आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दबाव बनवाने की थी। हम इसमें सफल भी हुए। हमने मुंबई हमले के 14 दिनों के भीतर हाफिज सईद को वैश्विक आतंकी घोषित कराया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुंबई हमलों में शामिल लश्कर के शीर्ष सदस्यों को भी आतंकवादियों के रूप में प्रतिबंध सूची में डाल दिया। इसने आज लश्कर को निष्प्रभावी बना दिया है। 26/11 हमले के बाद कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने तटीय सुरक्षा को मजबूत किया और राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी केंद्र (एनसीटीसी) का विचार रखा। लेकिन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विचार का विरोध किया। हमने नैटग्रिड की भी कल्पना की जो एक एकीकृत इंटेलिजेंस ग्रिड है, जो भारत सरकार की मुख्य सुरक्षा एजेंसियों के डाटाबेस को जोड़ने के लिए है, जो खुफिया के व्यापक पैटर्न को आसानी से एक्सेस कर सकता है। लेकिन मोदी सरकार ने एनसीटीसी और नैटग्रिड को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

आपने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर जहां चुप्पी साधी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये केवल दीवाली के लिए नहीं रखे हैं। आपको क्या लगता है कि यह बयान जनता से ज्यादा जुड़ता है।

हमारी परमाणु क्षमताएं हमारी ताकत हैं। पंडित नेहरू ने हमारी परमाणु क्षमताओं की नींव रखी। इंदिरा गांधी ने 1974 में पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया था। तब से हर कांग्रेस सरकार ने हमारे नागरिक और सैन्य परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने और इसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। परिणामस्वरूप हमारी हथियारों की क्षमता का परीक्षण 13 महीने की वाजपेयी सरकार द्वारा 1998 में भी किया गया। परमाणु शक्ति और परमाणु शक्ति का शांतिपूर्ण उपयोग हमारे राष्ट्र की जिम्मेदार नीतियां हैं। आपको याद होगा कि देश के परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने के लिए हमने यूपीए की कांग्रेस सरकार के अस्तित्व को दांव पर लगा दिया था। हमने कभी भी इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया।

क्या आप इससे सहमत है कि भाजपा ने सफल तरीके से नौकरी और ग्रामीण संकट से ध्यान हटाकर सुरक्षा और आतंक को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना दिया है?

सच्चाई यह है कि मोदीजी ने प्रति वर्ष दो करोड़ नौकरियों का वादा किया था, लेकिन उनकी नोटबंदी की विघटनकारी नीतियों और त्रुटिपूर्ण जीएसटी ने युवाओं से चार करोड़ से अधिक नौकरियां छीन ली हैं। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी के साथ 45 साल के उच्च स्तर पर है। जबकि 2011-12 में यूपीए के दौरान यह 2.2 फीसदी थी।

कांग्रेस न्याय योजना लेकर आई है। एक अर्थशास्त्री के तौर पर आपको नहीं लगता कि इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा?

न्याय मतलब न्यूनतम आय योजना कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक शक्तिशाली विचार है। इसके दो फायदे होंगे गरीबी दूर होगी इसके साथ ही राष्ट्र में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकेंगी। न्याय योजना से देश की गरीब 20 फीसदी आबादी वाले परिवारों को सालाना 72 हजार रुपये की आय का समर्थन मिलेगा। यह योजना जीडीपी के 1.2 से लेकर 1.5 फीसदी तक असर करेगी। हमारी विशाल अर्थव्यवस्था इसे स्वीकार कर लेगी।

प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से कांग्रेस में किसी तरह अंतर आएगा?

प्रियंका गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सहज संवाद है। उनकी मूलभूत मुद्दों को लेकर समझ अच्छी है। उनकी शालीनता उनका सबसे बड़ा गुण है। मुझे पूरा विश्वास है कि वे कांग्रेस पार्टी को ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

अमृतसर से आपके चुनाव लड़ने को लेकर काफी चर्चा हुई। पर अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो क्या उनकी कैबिनेट में काम करेंगे?

छह दशक से अलग अलग रूप में देश की सेवा करता आया हूं। मुझे प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा करने का मौका मिला है। मैं सार्वजनिक जीवन में हूं और हमेशा सेवा करने के लिए तैयार हूं। अब समय आ गया है कि हम नेतृत्व को युवा हाथों में सौंप दें। मुझे राहुल गांधी के नेतृत्व में और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में पूरा भरोसा है।

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