गुरुग्राम में कौन मरेगा बाज़ी, कांग्रेस के 72000 या भाजपा का आतंक पर हमला।

मेवात और रेवाड़ी तक फैली गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से 24 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां 3 लाख से अधिक युवा पहली बार मतदान करेंगे।

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Gurugram: मेवात और रेवाड़ी तक फैली गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से 24 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां 3 लाख से अधिक युवा पहली बार मतदान करेंगे। गुड़गांव जिले के चार (गुड़गांव, पटौदी, बादशाहपुर और सोहना), मेवात के तीन (नूंह, पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका) और रेवाड़ी के दो (रेवाड़ी और बावल) विधानसभा हलके गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं।

गुड़गांव के विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का प्रभाव है। वहीं मेवात के तीनों हलकों में कांग्रेस प्रत्याशी अजय सिंह यादव प्रभावी दिखाई दे रहे हैं । नूंह और पुन्हाना में इनेलो के विधायक होने के बावजूद यहां पर पार्टी ने नई बनी जजपा की वजह से जनाधार खोया है। उनके वोटरों का झुकाव कांग्रेस की तरफ भी दिख रहा है। रेवाड़ी में जहां भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं बावल क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों के बीच वोटबैंक बंटता नजर आ रहा है।

गुड़गांव लोकसभा में जातिगत समीकरण –
मेवात
: नूंह, पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका विधानसभा क्षेत्र मेव बाहुल्य हैं। यहां पर 20 प्रतिशत आबादी हिंदू है और अन्य मुस्लिम हैं। हिंदू में अनुसूचित जाति के वोट कांग्रेस और बसपा के कैडर वोट कहे जाते हैं। यहां पाल और गोत्र पर मतदाता हमेशा बंटते रहे हैं। नूंह और पुन्हाना में दहंगल आैर छिरकलोत पाल के मतदाता ज्यादा हैं, जबकि फिरोजपुर झिरका में डेमरोज की संख्या ज्यादा है।
सोहना: यहां पर मेव, गुर्जर, राजपूत और अहीर मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है।

गुड़गांव और बादशाहपुर: गुड़गांव विधानसभा में पंजाबी समुदाय के लोग अधिक हैं। वहीं बादशाहपुर के पॉश एरिया में रहने वाले बाहरी लोग, जाट और अहीर की संख्या अधिक है। ये राष्ट्रीय दलों अधिक महत्व देते रहे हैं।
रेवाड़ी, बावल और पटौदी: रेवाड़ी और पटौदी में अहीर मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। बावल में जाट मतदाताओं की संख्या अधिक हैं।

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