क्या 30 नवंबर तक BJP-अजित पवार जुटा पाएंगे बहुमत का आंकड़ा

BJP और NCP ने मिलकर सरकार तो बना ली है लेकिन राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है। नवनियुक्त सरकार को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है।

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महाराष्ट्र की राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर हो जाएगा इसका किसी को अंदाजा तक नहीं था। सभी जगह शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) गठबंधन की सरकार बनने की चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच शनिवार सुबह राजभवन में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने मुख्यमंत्री और NCP नेता अजित पवार (Ajit Pawar) ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सभी को हैरान कर दिया। इस गठबंधन के बारे में किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी। अब दोनों के सामने विधानसभा में बहुमत साबित करने की सबसे बड़ी चुनौती है।

BJP और NCP ने मिलकर सरकार तो बना ली है लेकिन राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है। नवनियुक्त सरकार को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है। वहीं NCP अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि BJP के साथ जाने का फैसला अजित पवार (Ajit Pawar) का है न कि पार्टी का। राज्य विधानसभा के लिए 21 अक्तबूर को चुनाव हुए थे जिनका 24 अक्तूबर को फैसला आया था। इसमें NCP के खाते में 54 सीटें गई थीं। अब यह देखना होगी कि NCP के कितने विधायक पार्टी से अलग होकर अजित के साथ जाएंगे।

महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटे हैं। जिसमें से भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44 और NCP को 54 सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा बहुजन विकास अघाड़ी के खाते में तीन सीटें गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन, प्रहर जनशक्ति पार्टी और समाजवादी पार्टी को दो-दो सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं राज्यभर से 13 निर्दलीय उम्मीदवारों को चुना गया है।

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। किसी भी पार्टी को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए 145 का जादुई आंकड़ा चाहिए। चुनाव परिणाम में भाजपा के पास 105 और एनसीपी को 54 सीटें मिली हैं। यदि दोनों पार्टियों के आंकड़े को मिला दिया जाए तो यह 159 होता है जो बहुमत से ज्यादा है। लेकिन NCP अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि भाजपा के साथ सरकार बनाना गलत है। ऐसे में भाजपा को बहुमत साबित करने में परेशानी हो सकती है।

राज्य के ताजा घटनाक्रम पर नजर डाली जाए जो एनसीपी की राह से अलग जाकर भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले अजित पवार के पास जरूरी संख्या मौजूद है। शरद पवार का साफ कहना है कि भाजपा के साथ जाना अजित का व्यक्तिगत निर्णय है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा को एनसीपी के सभी 54 विधायकों का समर्थन नहीं मिलने वाला है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अजित के पास एनसीपी के आधे से ज्यादा विधायकों का समर्थन है। वहीं भाजपा दावा कर रही है कि उसे 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है।

एनसीपी के 54 विधायकों को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। दल बदल कानून के प्रावधान के अंतर्गत अलग गुट को मान्यता हासिल करने के लिए दो तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इस तरह अजित पवार की चुनौती 36 विधायकों का समर्थन हासिल करना है। यदि वह 36 या इससे ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो उन्हें नई पार्टी बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मगर ऐसा न होने की परिस्थिति में बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्म हो सकती है।

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