अमित शाह द्वारा CAA पर अखिलेश, राहुल, ममता को बहस की चुनौती दिए जाने पर मायावती ने कहा ‘उनसे क्यों बहस करेंगे, मुझसे करिए’।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा CAA पर अखिलेश, राहुल और ममता को बहस की चुनौती दिए जाने पर कहा कि उनसे क्यों बहस करेंगे, मुझसे करिए।

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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बाद बसपा की अध्यक्ष मायावती (BSP Supremo Mayawati) ने बुधवार को संशोधित नागरिकता क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के मुद्दे पर बहस करने की सत्तापक्ष की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी CAA और NRC के मुद्दे पर किसी भी मंच पर बहस करने को तैयार है। इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून पर असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमना-सामना करने की चुनौती दे चुके हैं। आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा CAA पर अखिलेश, राहुल और ममता को बहस की चुनौती दिए जाने पर कहा कि उनसे क्यों बहस करेंगे, मुझसे करिए।

मायावती ने Tweet कर कहा, “अति-विवादित CAA/NRC/NPR के खिलाफ पूरे देश में खासकर युवा व महिलाओं के संगठित होकर संघर्ष व आन्दोलित हो जाने से परेशान केन्द्र सरकार द्वारा लखनऊ की रैली में विपक्ष को इस मुद्दे पर बहस करने की चुनौती को बसपा किसी भी मंच पर व कहीं भी स्वीकार करने को तैयार है।”

अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘हम विकास पर बहस करने को तैयार हैं। यात रखिए देश बेरोजगारी में फंस गया है। इतने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी कभी नहीं आई होगी। अगर यही हालात रहें तो बेरोजगारवाद की भी संख्या बढ़ जाएगी। अब तो किसान के बाद नौजवान भी आत्महत्या करने लगे हैं। अर्थव्यवस्था, नौकरी, नोटबंदी के सवाल पर बहस नहीं करना चाहते हैं वे, इसलिए हम चाहते हैं कि विकास पर बहस करें।’

करीमनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि वे नागरिकता कानून, एनपीआर और एनआरसी पर बहस करने के लिए तैयार हैं। उन्होने कहा कि आपको मेरे साथ बहस करनी चाहिए। उनके साथ बहस क्यों? बहस एक दाढ़ी वाले शख्स के साथ होनी चाहिए। मैं सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर बहस कर सकता हूं।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध कर रहे विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए मंगलवार को उन्हें चुनौती दी कि जिसको विरोध करना है, करे लेकिन सीएए वापस नहीं होने वाला है। शाह ने CAA के समर्थन में राजधानी के बंग्लाबाजार स्थित कथा पार्क में आयोजित विशाल जनसभा में कहा, ‘इस बिल को लोकसभा में मैंने पेश किया है। मैं विपक्षियों से कहना चाहता हूं कि आप इस बिल पर सार्वजनिक रूप से चर्चा कर लो। यदि ये अगर किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकता है, तो उसे साबित करके दिखाओ।’ उन्होंने कहा, ‘देश में सीएए के खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं। CAA में कहीं पर भी किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है, इसमें नागरिकता देने का प्रावधान है … मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूं कि जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होने वाला है।’

गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी है। उन्होंने कहा, ‘सीएए के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इससे देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। मैं कहने आया हूं कि जिसमें भी हिम्मत है वह इस पर चर्चा करने के लिये सार्वजनिक मंच ढूंढ ले। हम चर्चा करने के लिये तैयार हैं।’ शाह ने कहा कि सीएए की कोई भी धारा मुसलमान तो छोड़ दें, किसी भी बाशिंदे की नागरिकता लेती हो तो बता दें। गृह मंत्री ने दावा किया, ‘बंटवारे के वक्त पूर्वी पाकिस्तान में 30 प्रतिशत और पश्चिमी पाकिस्तान में 23 प्रतिशत हिन्दू, सिख बौद्ध और जैन थे मगर अब वहां अब वे सिर्फ सात और तीन प्रतिशत ही रह गये हैं। बाकी कहां गये? वे या तो मार दिये गये या उनका धर्म परिवर्तन किया… या फिर भारत आकर शरण ली। इन आंखों के अंधों को दिखायी नहीं दिया कि करोड़ों लोगों पर अत्याचार हुआ।”

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