2020 के बजट में Income Tax में बड़ी राहत मिलने की संभावना

SBI की पूर्व Chief Economist बृंदा जागीरदार ने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुस्ती के दौर से निकालने के लिए खपत और निवेश दोनों बढ़ाने की जरूरत है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने हाल ही में Income Tax में कटौती का संकेत दिया है। विश्लेषकों के मुताबिक सरकार वित्त वर्ष 2020-21 के बजट (Budget) में आयकर के मोर्चे पर राहत का ऐलान कर सकती है। इससे देश के करोड़ों वेतनभोगियों को सीधा फायदा होगा, जो आर्थिक सुस्ती के इस दौर में सरकार की ओर से रिलीफ की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि केंद्र सरकार ने इस साल सितंबर में कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax) में भारी कमी के जरिए देश के उद्योग जगत को बड़ी राहत दी थी।

सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बीते सप्ताह राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार देश में खपत बढ़ाने के लिए Personal Income Tax में कटौती समेत कई उपायों पर विचार कर रही है। हालांकि, आयकर में छूट को लेकर उन्होंने आगामी बजट तक इंतजार करने की बात कही। आगामी बजट अगले साल फरवरी में पेश किया जाएगा। ऐसे में आइए जानते हैं देश का मिडिल क्लास आयकर में कितनी छूट की उम्मीद कर सकता है।

SBI की पूर्व Chief Economist बृंदा जागीरदार ने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुस्ती के दौर से निकालने के लिए खपत और निवेश दोनों बढ़ाने की जरूरत है। सरकार ने Corporate Tax cut के जरिए कंपनियों को राहत तो दे दी है लेकिन मिडिल क्लास का कॉन्फिडेंस वापस लाने के लिए Individual Income Tax में कमी की जानी चाहिए। जागीरदार ने कहा कि GST लागू होने के बाद सरकार Indirect Tax को लेकर बहुत कुछ नहीं कर सकती है लेकिन Direct Tax को लेकर कुछ गुंजाइश अब भी नजर आ रही है।

उन्होंने कहा, ”सरकार मिडिल क्लास के हाथ में पैसे देने के लिए और खपत बढ़ाने के लिए आगामी बजट में Income Tax से जुड़ी बड़ी छूट का ऐलान कर सकती है। यह छूट इनकम टैक्स स्लैब और रेट दोनों में मिल सकती है।”

टैक्‍स एक्‍सपर्ट बलवंत जैन ने इस संबंध में ‘Laffer Curve’ सिद्धांत को उद्धत किया। यह सिद्धांत टैक्स रेट और सरकार के राजस्व के वसूली के संबंध को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स में कमी करने से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे Indirect Tax के रूप में राजस्व बढ़ेगा ही।

रेटिंग एजेंसी CRISIL के Chief Economist डी के जोशी के मुताबिक देश में डिमांड बढ़ाने और इकोनॉमी को Slowdown से बाहर निकालने के लिए सरकार को एक नहीं बल्कि कई कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि Income Tax में कटौती उनमें से एक उपाय हो सकता है। वित्त मंत्री सीतारमण ने भी कहा था कि सरकार आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कर में कटौती सहित कई उपायों के बारे में सोच रही है।

डी के जोशी (DK Joshi) ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”इकोनॉमी को मजबूती देने के लिए एक ओवरऑल पैकेज की जरूरत है। इसके लिए लोगों की खर्च करने की शक्ति बढ़ाये जाने की जरूरत है। सरकार को सबसे कम आय वाले लोगों के हाथ में पैसे देने होंगे। यह राशि मनरेगा जैसी योजनाओं के जरिए दी जा सकती है। Income Tax में कटौती भी एक उपाय हो सकता है और यह डिमांड बढ़ाने में कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के फैसले से भी ज्यादा मददगार साबित होगा।’

Personal Income Tax में कटौती की ये बातें ऐसे समय में हो रही हैं जब देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घटकर छह साल से भी अधिक समय के निचले स्तर पर पहुंच गई है। देश की GDP वृद्धि दर जुलाई से सितंबर के बीच 4.5 फीसद रही। सरकार इस साल अब तक देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई कदम उठा चुकी है। कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax) में कटौती इस दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा फैसला था। वहीं, RBI भी लोगों की EMI का बोझ करने के लिए रेपो रेट में अब तक 1.35 फीसद की कमी कर चुकी है।

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