मोदी सरकार का सदन में पहला टेस्ट, समझिए 2019 से पहले कांग्रेस और बीजेपी के लिए कितना अहम

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संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपनी पहली परीक्षा से गुजरेंगे। पिछले चार साल से सत्तारूढ़ मोदी सरकार के खिलाफ रखे गए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और फिर वोटिंग होगी। लोकसभा में संख्याबल के लिहाज मोदी सरकार बहुमत के पार है, लेकिन राजनीति कब क्या करवट ले, कहा नहीं जा सकता। इस अविश्वास प्रस्ताव में कुछ सियासी दांवपेच भी छिपे हैं। पिछले सत्र में नोटिस नामंजूर कर दिया गया था, फिर अब विपक्ष को यह मौका क्यों मिला? नंबर गेम में पीछे होने और हार तय दिखने पर भी विपक्ष मोदी की परीक्षा लेने पर क्यों उतारू है? इसके पीछे सरकार और विपक्ष की अपनी-अपनी रणनीति है। इस सियासी मौके पर कौन चौका मारेगा और कौन होगा बोल्ड, यह कल लोकसभा में साफ होगा। आइए तब तक एक नजर डालते हैं अविश्वास प्रस्ताव के गणित, समीकरण और सियासी दांवपेच पर…

…तो चर्चा के लिए इसलिए तैयार हुई सरकार
दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहता वहीं, सरकार ने अपना रुख बदला है जिससे मॉनसून सत्र के धुलने पर किसी को यह कहने का मौका न मिले कि बहुमत होने के बावजूद बीजेपी डर गई। यही वजह है कि सरकार की ओर से स्पष्ट कह दिया गया कि वह इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है। ऐसे में NDA के घटक दलों के अलावा उन विपक्षी दलों का रुख महत्वपूर्ण होगा जिनके बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार न करके ऐसा संदेश नहीं देना चाहती थी कि वह फ्लोर टेस्ट से बचना चाहती है। पार्टी ने विप जारी कर अपने सभी सांसदों को गुरुवार और शुक्रवार को सदन में मौजूद रहने को कहा है।

TMC तैयार, विप जारी
इस वीकेंड कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की एक बड़ी रैली होनेवाली है, जिसमें माना जा रहा था कि ममता बनर्जी के 34 सांसद मौजूद रह सकते हैं। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के मद्देनजर TMC चीफ ने फौरन विप जारी कर सभी सांसदों को शुक्रवार को दिल्ली में ही रहने का निर्देश दे दिया। उधर, NCP के सांसदों को भी शनिवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में शामिल होना है लेकिन इससे पहले वह शुक्रवार को सदन में मौजूद रहेंगे।

बीजेपी के कुछ सांसद हैं नाराज
बीजेपी के मैनेजरों का कहना है कि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बड़ी आसानी से गिर जाएगा क्योंकि सदन में NDA के पास 315 सांसद (स्पीकर समेत) हैं। आपको बता दें कि 535 सदस्यों में से बहुमत का आंकड़ा 268 है। बीजेपी के पास दो नामित सदस्यों को शामिल करते हुए सदन में 273 सदस्य हैं। हालांकि NDA के अंतिम नंबर में थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है क्योंकि कुछ BJP के सांसद असंतुष्ट हैं जबकि कुछ बीमार या विदेश में हैं।

विपक्ष के पास संख्याबल
उधर, विपक्ष के पास 222 सदस्यों के समर्थन की बात कही जा रही है, जिसमें कांग्रेस की अगुआई वाली UPA के 63, AIADMK के 37, TMC के 34, BJD के 20, TDP के 16, और TRS के 11 सांसद शामिल हैं। हालांकि सरकार यह मानकर चल रही है कि बीजेडी, टीआरएस और AIADMK का समर्थन भले न मिले पर ये पार्टियां तटस्थ रह सकती हैं।

विपक्ष में भी दो धड़े?
विपक्ष साफतौर पर दो धड़े में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले खेमे में कुछ पार्टियां हैं जिसमें TMC, CPM, NCP, SP, RJD और AAP व टीडीपी शामिल हैं और उनकी कुल स्ट्रेंथ 150 बैठती है और ये पार्टियां प्रस्ताव के पक्ष में हैं। दूसरा ग्रुप उन पार्टियों का है जो सदन में तटस्थ रह सकती हैं, जिनमें AIADMK, BJD और टीआरएस शामिल हैं और इनका आंकड़ा 70 है। ये पार्टियां सरकार की आलोचना भले कर सकती हैं पर माना जा रहा है कि वोटिंग से ये दूर रह सकती हैं।

कांग्रेस और सरकार की मंशा
कांग्रेस पार्टी चाहती है कि अविश्वास प्रस्ताव के समय वह बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसान, सामाजिक तनाव, महंगाई आदि का मुद्दा उठाकर देश के लोगों का ध्यान आकर्षित करे। साथ ही सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता का भी संदेश जाए। वहीं सरकार को इस प्रस्ताव के फेल होने पर विधानसभा चुनावों से पहले ‘विक्ट्री’ साइन दिखाने का मौका मिल जाएगा।

एकजुटता और कमजोर जताने की कोशिश
आपको बता दें कि स्पीकर सुमित्रा महाजन ने तेलुगू देशम पार्टी द्वारा दिए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को बुधवार को स्वीकार कर लिया था। सत्तारूढ़ गठबंधन अविश्वास प्रस्ताव को नाकाम कर विपक्षी एकता पर गहरी चोट करना चाहता है और उसकी कोशिश है गैर-NDA सदस्य गैरहाजिर रहें जिससे विपक्ष काफी कमजोर स्थिति में दिखे।

हालांकि विपक्ष की रणनीति यह है कि भले ही नंबर उसके साथ न हो पर वह कई मुद्दों पर बहस के जरिए मोदी सरकार को घेरे। इसके साथ ही विपक्ष 2019 से पहले इस बड़े घटनाक्रम के जरिए गैर एनडीए पार्टियों की एकजुटता को भी दिखाना चाहता है। एक नेता ने कहा, ‘हम महंगाई, असहिष्णुता, GST को ठीक तरह से लागू न किए जाने, किसानों की बदहाली, MSP का मुद्दा उठाएंगे।’

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