Movie Review: फिल्म ओमेर्टा में राजकुमार राव बने उमर सईद शेख…

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राजकुमार राव ने अपनी हर फिल्म में दशर्को के मन में एक अलग छाप छोड़ी है।उन्होंने अपने  अभिनय कि प्रतिभा को साबित किया है।  फिल्म ओमेर्टा में भी राजकुमार राव  आतंकवादी अहमद ओमर सईद शेख का किरदार निभा रहे है।

राजकुमार  राव ने बताया, मुझे वह चीजें पसंद नहीं हैं जो आसानी से हो जाती हैं। एक अभिनेता के तौर पर मैं सीमा से आगे खुद को खींचना पसंद करता हूं।  मुझे उन किरदारों को पर्दे पर अदा करना अच्छा लगता है जो मुझे चुनौती देते हैं और जिसमें मैं कुछ अलग कर पाता हूं। अब तक मैंने जितने किरदार अदा किए, उनसे मैं किसी न किसी तरह खुद को जोड़ सकता था लेकिन मैं इस दुनिया को तो बिल्कुल ही नहीं जानता था।

ओमेर्टा फिल्म के निर्देशक  हंसल ने स्क्रिप्ट और निर्देशन की लगाम कसी रखी और एक घृणित आतंकी की जिंदगी को पर्दे पर उतारा। फिल्म इस धारणा को तोड़ती है कि गरीबी-अशिक्षा-भूख और अभावों की जिंदगी ही किसी को आतंकवाद की राह पर धकेलती है। फिल्म में हंसल ने पाकिस्तान का भी पर्दाफाश किया है कि कैसे वह अपनी धरती पर आतंकियों की पौध तैयार करता है, उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई जहरीले सांपों को दूध पिलाती है और भारत के विरुद्ध हमले तथा अन्य अपराध करने को उकसाता है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी उमर सईद शेख नाम के शख्स कि है जो ब्रिटेन का रहने वाला है,और लंदन में रहता है। उमर सईद शेख एक ऐसे इंसान की है जिसने 90 के दशक की शुरुआत में बोस्निया और फिलिस्तीन में मारे जा रहे मुस्लमानों के लिए इंसाफ चाहता है और साथ हो रही नाइंसाफी के खिलाफ लड़ना चाहता है।अपने इन्हीं जज्बातों को वो लंदन के एक मौलाना के साथ साझा करता है और फिर शुरू होता है जिहाद का सफर। इस सफर के दौरान वो पाकिस्तान से होते हुए भारत में दाखिल होता है।

उमर सईद शेख  जिसने अपने इस जिहाद की शुरुआत तो बोस्निया में मुसलमानों के साथ हो रही नाइंसाफी के लिए की थी लेकिन बाद में वो भी कश्मीर राग में उलझकर रह गया। अपनी इस जिहाद की लड़ाई के पहले पड़ाव में वो भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचता है।  यहां वो लोगों से ये कहकर मिलता है कि वो लंदन का रहने वाला है और अपने माता पिता से मिलने के लिए यहां आया है।  इसी दौरान उमर सईद शेख भारत के चार टूरिस्टों को किडनैप कर लेता है।  हालांकि पुलिस की समझदारी और तेजी के चलते उन चारों ही टूरिस्टों को बचा लिया जाता है। इसके बाद वो जेल में जाता है और फिर बाहर आता है। जेल से बाहर आते ही वो 1993 में हुए बम धमाकों के दौरान भारत सरकार को और पाकिस्तान सरकार को दो झूठे फोन करता है। जिसके चलते दोनों ही देशों की सीमाओं पर युद्ध जैसी स्थिति बन जाती है। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई में उमर सहित दो अन्य आतंकवादियों को 93 के बम धमाकों की साजिश के आरोप में जेल में बंद कर दिया जाता है।

इसके बाद पाकिस्तान के आतंकी भारतीय प्लेन हाईजैक कर तीन आतंकवादियों की रिहाई मांगते हैं। इन तीन आतंकवादियों में उमर  सईद शेख के साथ हाफिज सईद भी शामिल था। 1999 में भारत-नेपाल की फ्लाइट को हाइजैक किया गया था जिसके पैसेंजर्स की सुरक्षा के बदले उमर सहिद दो आतंकवादियों को भारत सरकार द्वारा रिहा किया गया और उसके बाद होता है वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमला। इस हमले ने अमेरिका की नींव को हिलाकर रख दिया था साथ ही पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया था। हालांकि फिल्म में उमर सईद शेख  का इस हमले में डायरेक्ट इन्वॉलवमेंट नहीं दिखाया गया है। लेकिन अमेरिका के एक पत्रकार डेनियल पर्ल ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के जरिए इस हमले से उमर का कनेक्शन निकाल लिया था और इसके तार कश्मीर में बैठे अलगाववादी नेता गिलानी तक जोड़ लिए थे। डेनियल की मुलाकात उमर से होती है और उमर उसको विश्वास दिलाता है कि वो उसे गिलानी से मिलवाएगा।  इसी दौरान उमर डेनियल को अगवा कर उसकी हत्या कर देता है।  बाद में इसी हत्या के आरोप में उसे जेल होती है।

ओमेर्टा के संवाद अंग्रेजी में हैं। इसमें बोस्निया और कश्मीर से लेकर भारत-पाकिस्तान से जुड़े विवादित मसले भी हैं। जिन पर आतंकी ठिकानों, उनके छोटे-छोटे भाषणों को शूट करने साथ निर्देशक ने कुछ असली फुटेज का भी इस्तेमाल किया है। जिससे फिल्म कहीं-कहीं डॉक्युमेंट्री जैसा आभास देती है।

हंसल ने फिल्म को खूबसूरती से शूट किया। ओमेर्टा की मजबूत कड़ी राजकुमार राव हैं। जिनका अभिनय शानदार है। वह किरदार से एक जान हो जाते हैं। हंसल-शाहिद की जोड़ी आपको शाहिद में पसंद आई थी तो फिर यहां भी आप उन पर भरोसा कर सकते हैं। फिल्म 4 मई यानि आज रिलीज को चुकी है।

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