मूवी रिव्यू: फिल्म नानू की जानू में अभय लेकर आए है हॉरर कॉमेडी….

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बॉलीवुड अभिनेता अभय देओल इस बार फिल्म ‘नानू की जानू’ के जरिए दर्शकों के लिए हॉरर कॉमेडी लाए हैं। लेकिन दर्शकों को अभय की ये हॉरर कॉमेडी ज्यादा डरा नहीं पाई। फिल्म में अभय नानू का किरदार निभा रहे हैं,जो कि एक क्रिमिनल गैंग का लीडर है। नानू की दिल्ली-एनसीआर की अच्छी धौंस है। लह कभी भी किसी के घर दरवाजा खटका कर नहीं बल्कि दरवाजा तोड़ कर अंदर जाता है। ऐसे में नानू एक अपार्टमेंट में अपने दोस्त के साथ रहने लगता है।

यह कहानी है नानू (अभय देओल) की जो दिल्ली में लोगों के मकानों पर अवैध कब्जा करता है। यही उसका धंधा है। इस काम में उसके मित्र दब्बू (मनु ऋषि) और 90 (जगदीश शर्मा) उसका साथ देते हैं। एक दिन नानू के साथ कुछ अजीब-अजीब सी घटनाएं होने लगती है और जब उसकी जड़ में जाया जाता है तो पता चलता है कि नानू के पीछे एक भूतनी (पत्रलेखा) पड़ गई है। वो भूतनी नानू से प्यार करने लगी है। इसके आगे क्या होगा? क्या अनुज भूतनी से पीछा छुड़ा पायेगा? आखिर नानू के पीछे भूतनी क्यों पड़ी है? इसी ताने-बाने पर बनी है फ़िल्म –‘नानू की जानू’।

निर्देशक फ़राज़ हैदर ने एक कमर्शियल और मनोरंजक फ़िल्म बनाई है। पूरी फ़िल्म बहुत अच्छे से चलती है। कहीं आप मुस्कुराते हैं तो कहीं ठहाके लगाते हैं मगर, क्लाइमेक्स पर आकर फ़िल्म थोड़ी बचकाना हो जाती है। हालांकि फ़राज़ ने क्लाइमेक्स में आकर फ़िल्ममेकर की जिम्मेदारी को समझते हुए अपना काम किया है मगर वह फ़िल्म के टेक्सचर से अलग हो जाने के कारण प्रभाव नहीं छोड़ पाता।

अभिनय की बात करें तो अभय देओल हमेशा की तरह पूरे फॉर्म में नज़र आये हैं और पत्रलेखा का रोल कम था लेकिन, उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया है। मनु ऋषि पूरी तरह छाए रहे। बृजेन्द्र काला और मनोज पाहवा थोड़ी देर के लिए आते हैं मगर सचिन-सहवाग की तरह चौके-छक्के लगाकर चले जाते हैं। मां के किरदार में हिमानी शिवपुरी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती हैं! नानू के दोस्तों में 90 के किरदार में जगदीश शर्मा भी ध्यान खींचते हैं।

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