गैर गांधी होगा कांग्रेस का नया चेहरा, मुकुल वासनिक हैं प्रबल दावेदार

पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक अंतरिम अध्यक्ष की रेस में प्रबल दावेदार माने जा रहे। वरिष्ठ नेताओं की पीढ़ी में मल्लिकार्जुन खड़गे की दावेदारी भी गंभीर है।

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कांग्रेस (Congress) अपना नया अध्यक्ष चुन लेगी या राहुल गांधी के उत्तराधिकारी की तलाश अभी और लंबी होगी, शनिवार को इसकी तस्वीर साफ हो जाएगी। पिछले ढाई महीने से नए नेतृत्व का चेहरा तय करने पर जारी सियासी चुनौती को अनुच्छेद 370 (Article 370) पर पार्टी में मचे घमासान ने और बढ़ा दिया है।

कांग्रेस के सबसे संकटपूर्ण दौर में फिलहाल गांधी परिवार का नेतृत्व होते हुए जब पार्टी नेता खुलेआम पार्टी लाइन से असहमति जता रहे हैं। तब गांधी परिवार से बाहर के नये नेतृत्व की भविष्य की चुनौती कितनी गंभीर होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल, चुनौतियों के इस चक्रव्यूह से बाहर आने का रास्ता निकालने की पहली कोशिश में उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस कम से कम अपना नया अंतरिम अध्यक्ष तो चुन लेगी।

पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक (Mukul Wasnik) अंतरिम अध्यक्ष की रेस में प्रबल दावेदार माने जा रहे। वरिष्ठ नेताओं की पीढ़ी में मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Khadge) की दावेदारी भी गंभीर है। वासनिक और पिछली लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे खड़गे के अलावा पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के नाम भी संभावितों में हैं।

खास बात यह है कि ये सभी नेता दलित समुदाय से हैं। वहीं, युवा दावेदारों में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अनुच्छेद 370 पर पार्टी लाइन की मुखालफत कर खुद को दौड़ से बाहर कर लिया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक पार्टी के नये अध्यक्ष का फैसला करने के लिए ही विशेष रूप से बुलाई गई है। इसीलिए पार्टी संविधान के अनुसार कार्यसमिति सबसे पहले राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार करेगी और इसके बाद नये अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी में व्यापक अंदरूनी राय यही है कि नये पूर्णकालिक अध्यक्ष पर कोई फैसला नहीं हो पाता है, तो कार्यसमिति को अस्थायी या अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर देना चाहिए।

गांधी परिवार से बाहर के चेहरे पर पार्टी नेताओं के बीच सहमति बनाने की चुनौती को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि कार्यसमिति फिलहाल अंतरिम अध्यक्ष का ही चुनाव करेगी। संकेत यह भी हैं कि चार से छह नेताओं का एक विशेष पैनल बनाने का भी फैसला लिया जा सकता है। इस पैनल को पार्टी में चर्चा कर अंतरिम अध्यक्ष के नाम का चयन करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

नेताओं के बीच घमासान ज्यादा नहीं हुआ और शनिवार को कार्यसमिति में अंतरिम अध्यक्ष का चयन हो जाता है, तो फिर पैनल को अगले छह-आठ महीने में संगठन चुनाव कराने की रूपरेखा तय करने का जिम्मा सौंपा जा सकता है। पूर्णकालिक अध्यक्ष का चयन चुनाव के जरिए करा गांधी परिवार से बाहर के नेतृत्व की पार्टी में स्वीकारोक्ति मौजूदा हालातों में पार्टी के लिए ज्यादा मुफीद होगा।

पार्टी के हाशिए पर चले जाने के बाद भी गांधी परिवार से बाहर के नेतृत्व को कबूल करने को लेकर नेताओं में सहजता नहीं दिख रही। इसीलिए पहले राहुल गांधी पर इस्तीफा वापस लेने का नेताओं ने दबाव डाला। मगर जब वे नहीं माने और इस्तीफे की चिट्ठी डेढ़ महीने पहले सार्वजनिक कर दी तो फिर कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाने की वकालत शुरू कर दी।

गांधी परिवार से बाहर के चेहरे को ही कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाने के राहुल गांधी के अडिग रुख को देखते हुए प्रियंका फिलहाल दौड़ में नहीं हैं। ऐसे में यह तय है कि दो दशक बाद एक बार फिर गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता कांग्रेस का अध्यक्ष होगा।

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