मुलायम सिंह की छोटी बहू ने CAA और NRC का किया समर्थन, कहा- इसमें गलत क्या है ?

अपर्णा ने NRC को लेकर सवाल उठाया कि जो भारत का है, उसे अपना नाम रजिस्टर में दर्ज कराने में क्या परेशानी है.

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एक तरफ जहां पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav), CAA और NRC का विरोध कर रहे हैं तो वहीं उन्हीं की परिवार की सदस्य इसका समर्थन कर रही हैं. समाजवादी पार्टी (SP) के सरंरक्षक मुलायम (Mulayam Singh Yadav) की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने इसे लेकर Tweet किया है. अपर्णा ने ऑफिशियल Twitter हैंडल पर लिखा कि जो भारत का है, उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है? अपने Tweet में उन्होंने जामिया मिल्लिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल किया.

अपर्णा ने NRC को लेकर हो रहे विरोध पर भी सवाल उठाए हैं. फेसबुक और Twitter पर अपने एकाउंट से पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाया कि जो भारत का है, उसे अपना नाम रजिस्टर में दर्ज कराने में क्या परेशानी है.

पहला मौका नहीं, जब अपर्णा ने मोदी सरकार (Modi Government) के फैसले का खुला समर्थन किया हो. इससे पहले भी वह स्वच्छता अभियान पर केंद्र सरकार का समर्थन कर चुकी हैं. अपर्णा सपा (Samajwadi Party) की सदस्य हैं और साल 2017 में उन्होंने पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था. NRC के मुद्दे पर अपर्णा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की राय अलग-अलग है.

बता दें, दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस कार्रवाई और विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) के खिलाफ सोमवार को देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन का समर्थन नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी करते नजर आए. कहीं-कहीं ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, तो कहीं इसने हिंसक रूप ले लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन प्रदर्शनों को दुखद एवं निराशाजनक बताया और शांति की अपील की. जामिया के छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और नागरिकता कानून के खिलाफ गुस्से का असर उत्तर प्रदेश से लेकर केरल और महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) तक में देखा गया.

जामिया (Jamia Milia Islamia) के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष एकजुट हो गया. कांग्रेस के अलावा चार अन्य राजनीतिक दल के नेताओं ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर जामिया परिसर में रविवार शाम की घटनाओं की उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की.

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