ऐक्टिविस्ट्स को अरेस्ट करने पर मानवाधिकार आयोग का नोटिस

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नक्सलियों से कथित संबंधों के आरोप में अरेस्ट किए गए ऐक्टिविस्ट्स के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने टिप्पणी की है। आयोग का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा लगता है कि इन ऐक्टिविस्टिस की गिरफ्तारी में तय मानकों का पालन नहीं किया गया है, जो कि उनके मानवाधिकारों का हनन है। क्योंकि 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा, नक्सलियों से संबंधों और गैर-कानूनी गतिविधियों के आरोपों में 5 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें वरवर राव, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा शामिल हैं।

आयोग ने इस संबंध में महाराष्ट्र के चीफ सेक्रटरी और डीजीपी को नोटिस जारी कर पूरी प्रक्रिया के संबंध में 4 सप्ताह के भीतर जानकारी मांगी है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि पुलिस ने इस बात को लेकर संतोषजनकर जवाब नहीं दिया है कि आखिर उन्हें किस आरोप में अरेस्ट किया गया है। यही नहीं सुधा भारद्वाज की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी भी फरीदाबाद की चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है।

ऐक्टिविस्ट ने बताया कि उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया गया है। सुधा के मुताबिक एफआईआर में उनका नाम तक शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ उनकी विचारधारा के चलते प्रताड़ित किया जा रहा है। गौतम नवलखा के मामले में अदालत ने पुणे पुलिस से यह पूछा है बिना किसी स्थानीय गवाह के उसने ट्रांजिट रिमांड की मांग कैसे की।

इस बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी 5 ऐक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार की ओर से सत्ता का बेजा इस्तेमाल करने जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार उन आवाजों को दबाना चाहती है, जो दलितों के अधिकारों का समर्थन करते हैं। माया ने कहा, ‘ऐसा करके बीजेपी महाराष्ट्र और केंद्र में अपनी सरकारों की असफलता को छिपाने का प्रयास कर रही है।’

निरंजन कुमार

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