अगस्त तक रोज एक करोड़ लोगों का होगा टीकाकरण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोरोना रोधी टीकों की 1.57 करोड़ से अधिक खुराक मौजूद हैं।

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि जुलाई या अगस्त की शुरुआत तक COVID-19 के पर्याप्त टीके उपलब्ध होंगे, जिससे प्रति दिन एक करोड़ लोगों को टीका लगाया जा सकेगा। केंद्र ने यह भी कहा कि अगली जानकारी दिए जाने तक एक ही व्यक्ति को अलग-अलग कंपनी के टीके लगाने का प्रोटोकॉल नहीं है।

केंद्र ने बताया कि 7 मई को कोरोना मामलों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, उनमें करीब 69 फीसदी की कमी आई है। बीते 24 घंटे के दौरान 1,27,510 नये मामले सामने आये, जो 54 दिन में सबसे कम हैं। इस अवधि में 2,55,287 लोग इस महामारी से मुक्त हुए, जबकि 2710 संक्रमितों की जान गयी। मौतों का यह आंकड़ा 35 दिन में सबसे कम है। वहीं, 43 दिन बाद उपचाराधीन मामले 20 लाख से कम दर्ज किए गये। देश में अब 18,95,520 कोरोना संक्रमितों का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 6.73 फीसदी है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मामलों में 1,30,572 की कमी आयी।

मंत्रालय के अनुसार सोमवार को देश में 19.25 लाख कोरोना टेस्ट किए गये। संक्रमण की दैनिक दर कम होकर 6.62 और साप्ताहिक दर 8.64 फीसदी पर आ गयी है। देश में कोरोना की चपेट में आ चुके लोगों की कुल संख्या 2.81 करोड़ के पार हो चुकी है। इनमें से 2.59 करोड़ से ज्यादा लोग ठीक चुके हैं। मृतक संख्या बढ़कर 3,31,895 हो गयी। कोरोना मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 92.09 फीसदी हो गयी है, मृत्यु दर 1.18 फीसदी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोरोना रोधी टीकों की 1.57 करोड़ से अधिक खुराक मौजूद हैं। अब तक 23 करोड़ से अधिक खुराक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को मुहैया कराई गयी हैं।

सरकार ने मंगलवार को एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका इस्तेमाल ब्लैक फंगस संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की एक अधिसूचना के अनुसार इंजेक्शन के निर्यात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि निर्यातक को अपनी निर्यात खेप के लिए निदेशालय से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना जरूरी है।

कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में टीकों से प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाती है कि वे वायरस के नये स्वरूपों से भी सुरक्षित रह सकते हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। अमेरिका की रॉकफेलर यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने रक्त में मौजूद एंटीबॉडीज का विश्लेषण कर इनकी उत्पत्ति का पता लगाया। अध्ययन में शामिल 63 लोगों को पिछले साल कोरोना हुआ था। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि समय के साथ प्रतिरक्षा तंत्र की ‘मेमोरी बी कोशिकाओं’ से उत्पन्न एंटीबॉडीज की क्षमता कोरोना को समाप्त करने के लिहाज से बेहतर हुई। ‘मेमोरी बी कोशिकाओं’ में अनेक प्रकार के एंटीबॉडी संग्रहित रहते हैं। अध्ययन में सामने आया कि इन लोगों के अंदर वायरस के खिलाफ दीर्घकालिक सुरक्षा प्रणाली विकसित हो रही है। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि मॉडर्ना या फाइजर के टीके की कम से कम एक खुराक लेने वाले 26 लोगों के समूह में ये एंटीबॉडी और बढ़ गये।

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