लोकसभा में मनीष तिवारी ने उठाया सवाल, 300 करोड़ में कैसे साफ होगी देश की हवा ?

मनीष तिवारी ने कहा, 'जब दिल्ली में हर साल प्रदूषण का मुद्दा सामने आता है, तो ऐसा क्यों है कि इस पर सरकार और इस सदन से कोई आवाज नहीं उठती है?'

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संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के दूसरे दिन मंगलवार को लोकसभा में प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चर्चा हो रही है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने इस चर्चा में भाग लेते हुए अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या से निपटने के लिए 1981 में बने ‘एयर एक्ट’ (Air Act) को मजबूत करने की जरूरत है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि जनवरी 2018 में सरकार ने ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (National Clean Air Programme) की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य तो अच्छा है, लेकिन बजट सिर्फ 300 करोड़ रुपये है। उन्होंने सवाल पूछा कि महज 300 करोड़ में देश की हवा कैसे साफ होगी।

उन्होंने कहा कि एक्शन प्लान को पूरी तरह से फंडिंग की रणनीति भी सामने रखनी चाहिए। साथ ही सदन की स्थायी समिति बननी चाहिए। आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘जब दिल्ली में हर साल प्रदूषण का मुद्दा सामने आता है, तो ऐसा क्यों है कि इस पर सरकार और इस सदन से कोई आवाज नहीं उठती है?’ उन्होंने कहा कि लोगों को इस मुद्दे पर हर साल सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाने की जरूरत क्यों है? यह गंभीर चिंता का विषय है।’

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Congress MP Manish Tewari) ने पराली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को लेकर लगातार एक बात कही जाती है कि आसपास वाले सूबों की पराली जलने से दिल्ली में प्रदूषण (Pollution) बढ़ता है। हम मानते हैं कि पराली जलाना गलत है और हम उसका समर्थन नहीं करते। मगर उससे जुड़े कुछ आर्थिक मदद पर सरकार को काम करने की जरूरत है। खासतौर से इस वजह से छोटा किसान पराली जलाने पर मजबूर होता है।

मनीष तिवारी ने चर्चा में आगे कहा कि अगर प्रदूषण के लिए सिर्फ किसान को गुनाहगार बनाते हैं, तो आप भारत के किसान के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं। दिल्ली में 41 फीसदी प्रदूषण वाहनों से होता है जबकि 18.6 इंडस्ट्री, 4 थर्मल पावर प्लांट, 3.9 प्रतिशत कचरे से प्रदूषण होता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि 1972 में वह अकेली नेता थीं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में यह मुद्दा उठाया था।

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