अगर किसी को जमानत मिली है तो वे इसका आनंद ले. लेकिन हम करप्‍शन नहीं करने देंगे – पीएम मोदी

मुझे कभी लगता है कि अगर 125 करोड़ देशवासियों के सपनों को अगर मुझे जीना है, तो छोटा सोचने का हक़ भी नहीं है - पीएम मोदी

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लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने अपनी बात रखी। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मंगलवार को भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने चर्चा में भाग लेने वाले सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आपातकाल के बहाने विपक्ष को निशाने पर भी लिया। पीएम मोदी ने एक शेर के माध्यम से नई सरकार के उद्देश्यों की ओर इशारा किया। 

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण के कई मौकों को छोड़ दिया है. हम आज तीन तलाक बिल (Triple Talaq) लेकर आए तो कांग्रेस के पास इसका समर्थन करने का मौका आया. 35 साल बाद इसे धर्म से जोड़कर देखने का मौका आया. कांग्रेस (Congress) के एक मंत्री ने कहा था कि मुस्लिमों का उत्‍थान करना कांग्रेस की जिम्‍मेदारी नहीं है. प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेसी और कुछ अन्‍य पार्टी के सांसद संसद में हंगामा करने लगे.

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि कृषि व्‍यवस्‍था हमारे देश की रीढ़ है. हमें पुरानी परंपरा से बाहर निकलना होगा. किसनों को आगे बढ़ाने के लिए सबको हाथ बढ़ाना होगा. किसानों ने फसलों के जरिए देश की अर्थव्‍यवस्‍था को बल देने का काम किया है. अगर किसी की आलोचना करनी हो तो आंकड़ों का हर तरीके से इस्‍तेमाल किया जा सकता है. इसी सदन में जब हम अर्थव्‍यवस्‍था में 11 वें या 13वें स्‍थान पर पहुंचे थे तो उस वक्‍त मेज थपथपाई गई थी. लेनिक जब अर्थव्‍यवस्‍था छठें स्‍थान पर पहुंच गई तो ऐसा लगा कि जाने क्‍या हो गया है. आप कब तक इतने ऊंचे रहेंगे कि नीचे दिखाई भी न दे. हम सबको मिलकर देश को ऊंचाई पर ले जाना होगा. मेक इन इंडिया का खूब जमाक उड़ाया गया, लेकिन क्‍या कोई ऐसा भी है जो इसकी जरूरत से इनकार कर सकता है.

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के बाद अब जय अनुसंधान की जरूरत है. हमें पर्यटन पर और बल देने की जरूरत है. पीएम ने कहा कि हमें देश को आधुनिक आधारभूत ढांचे की ओर लेकर बढ़ना है. हमें दुनिया से मिलने वाली सभी व्‍यवस्‍थाओं को उपयोग करना चाहिए. हमें सामान्‍य लोगों के जीवन को सुगम बनाना है. गांव और शहर में रहने वाले लोगों को समान अवसर उपलब्‍ध कराना है. भ्रष्‍टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं. हमें इसलिए कोसा जा रहा कि हमनें फलाने को जेल में क्‍यों नहीं डाला. अगर किसी को जमानत मिली है तो वे इसका आनंद ले. लेकिन हम करप्‍शन नहीं करने देंगे. हमें सही रास्‍ते पर जाने की जरूरत है.

पीएम (PM Modi) ने कहा कि आजादी के पहले मरने का मिजाज था और आजादी के बाद देश के लिए जीने का संकल्प है. हमें आराम का रास्ता पसंद नहीं, हम देश के लिए जीने आए हैं. 3 सप्ताह में सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं. ताकि देश को आगे बढ़ाया जा सके. किसान सम्मान निधि का दायरा बढ़ाया गया है. सेना के जवानों के बच्चों और पुलिस के बच्चों के लिए भी अहम फैसले लिए गए हैं. लोगों के अधिकारियों से संबंधित भी कई बिल संसद में पेश हो चुके हैं. सबको साथ लेकर जितने भी काम हो सकते हैं, हम वे सभी काम कर रहे हैं.

पीएम ने कहा कि जब मैं मुख्‍यमंत्री था तब मुझे इन कामों के लिए अनशन पर बैठना पड़ा. जिसके कारण आज 4 करोड़ लोगों को पानी मिल रहा है. राजस्‍थान और गुजरात के लोग पानी की तकलीफ जानते हैं. इसी वजह से हमनें जल शक्ति मंत्रालय भी बनाया है. जल के संरक्षण पर हमें बल देना चाहिए. अभी भी जल संकट बढ़ता जा रहा है. जल संकट, महिलाओं और बच्‍चों को सबसे ज्‍यादा परेशान करता है.

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि विपक्ष के भाषणों में बाबा साहब के नाम का जिक्र तक नहीं होता. लेकिन एक ऊंचाई पर जाने के बाद ये नहीं दिखता है. पानी और बांधों के लिए बाबा साहब का काम सर्वोपरि है. सरदार सरोबर बांध की नींव पंडित नेहरू ने रखी थी लेकिन दशकों तक मंजूरी नहीं मिली. उस समय जो 6 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया और उसे पूरा होते-होते 60 हजार करोड़ तक पहुंच गया. हमनें इसे पूरा किया.

मुझे कभी लगता है कि अगर 125 करोड़ देशवासियों के सपनों को अगर मुझे जीना है, तो छोटा सोचने का हक़ भी नहीं है, और इसलिए जब हौंसला बना लिया ऊंची उड़ान का. तो देखना फिजूल है कद आसमान का.

आज 25 जून है, 25 जून की वो रात जब देश की आत्मा को कुचल दिया गया था. भारत में लोकतंत्र संविधान के पन्नों से पैदा नहीं हुआ है, भारत में लोकतंत्र सदियों से हमारी आत्मा है. किसी की सत्ता चली न जाए सिर्फ इसके लिए, उस आत्मा को कुचल दिया था.

मैं चुनौती देता हूं कि 2004 से 2014 तक शासन में बैठे हुए लोगों ने कभी अटल जी की सरकार की तारीफ की हो. उनकी छोड़ों नरसिम्हा राव जी की सरकार की तारीफ की हो. इस सदन में बैठे हुए इन लोगों ने तो एक बार भी मनमोहन सिंह जी की सरकार का जिक्र तक नहीं किया, अगर किया हो तो बताएं.

पीएम मोदी ने कहा कि 2004 के बाद की सरकार ने एक बार भी वाजपेयी की सरकार के एक भी काम का जिक्र नहीं किया था. अभी के भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र तक नहीं किया गया. लालकिले से बोलने वाला मैं पहला प्रधानमंत्री था जिसने कहा कि आजादी से लेकर अब केंद्र और राज्य की जितनी सरकारें थी, देश को आगे बढ़ाने में सबका योगदान है.

यहां कहा गया कि हमारी ऊंचाई को कोई कम नहीं कर सकता, ऐसी गलती हम नहीं करते. हम दूसरे की लकीर छोटी करने में विश्वास नहीं करते, हम अपनी लकीर लंबी करने के लिए जिंदगी खपा देते हैं. आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं कि कठिनाईयों के बावजूद हमने सही दिशा को छोड़ा नहीं.

हमने देश आजाद होने के बाद जाने-अनजाने में एक ऐसा कल्चर स्वीकार कर लिया था, जिसमें देश के सामान्य मानवी को हक के लिए जूझना पड़ता है. क्या सामान्य मानवी के हक की चीजें सहज रूप से उसे मिलनी चाहिए या नहीं. हमने मान लिया था कि ये तो ऐसे ही चलता है.

गुजरात का महत्‍वपूर्ण काम मैं बताना चाहता हूं. यहां 50 वर्षों तक राज्‍यपाल के भाषणों को निकाला जाए और उसका ग्रंथ बनाया जाए. ये हमारी व्‍यवस्‍था है कि शासन को चलाने के लिए हर सरकार के द्वारा किए गए अच्‍छे कार्यों को सराहा जाए तो उससे कुछ सीख ली जाए.

चर्चा के प्रारम्भ में पहली बार सदन में आए डॉ प्रताप सारंगी जी और आदिवासी समाज से आयी हमारी बहन हिना गावित जी ने जिस प्रकार से विषय को प्रस्तुत किया और जिस बारीकी से बातों को रखा, तो मैं समझता हूं कि मैं कुछ भी न बोलूं तो भी चलेगा.

ये कोई जीत या हार का प्रश्न नहीं है. ये जीवन की उस आस्था का विषय है, जहां कमिटमेंट क्या होता, डेडिकेशन क्या है, जनता के लिए जीना-जूझना-खपना क्या होता है. जब पांच साल की अविरत तपस्या का संतोष मिलता है तो वो एक अध्यात्म की अनुभूति करता है.

आपकी ऊंचाई आपको मुबारक हो, क्‍योंकि आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जड़ों से उखड़ गए हैं. आपको जमीन पर दिखने वाला तुच्‍क्ष दिखता है. हमारी आपसे तुलना नहीं है. हमारा रास्‍ता अलग है. हमारा रास्‍ता जड़ों के साथ जुड़ना है. मेरी शुभकामना है कि आप और ऊंचे जाईए.

पीएम मोदी ने कहा कि जनता के लिए जूझना, खपना 5 साल की तपस्या के फल के रूप में हमें मिला है. कौन हारा, कौन जीता यह मेरी सोच का हिस्सा नहीं है. मेरी नजर में देशवासियों के सपने और उनकी आशा रहती है. मेरी सरकार गरीबों को समर्पित है. 5 साल बाद संतोष के साथ कह सकता हूं जो संतोष जनता ने EVM का बटन दबाकर व्यक्त किया है.

सामान्‍य आदमी को उसका हक मिलना चाहिए. लेकिन चीजों को बदलने में बहुत मेहनत लगती है. 70 साल की बीमारियों को 5 साल में टीक करना कठिन होता है. हमनें कठिनाईयों के बाजवूद उस दिशा को छोड़ा नहीं. हम अपने मकसद पर चलते रहे और ये देश दूध का दूध और पानी का पानी भली भाति कर सकता है.

2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद, हर तराजू पर तौलने के बाद, पल पल को जनता ने जांचा और परखा है और उसके आधार पर समझा है और तब जाकर फिर से हमें चुना है. आज के सामान्य वातावरण में, भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में सबके लिए गौरव करने की बात है कि हमारा मतदाता कितना जागरूक है. अपने से ज्यादा वो अपने देश से कैसे प्यार करता है, ये इस चुनाव में देखने को मिला है. इस बात के लिए देश का मतदाता अभिनंदन का पात्र है.

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि देश की जनता ने पूरी तरह से जांच परख में हमें जनादेश दिया है. हम सभी मनुष्य हैं और जो छाप मन पर रहती है और उसका निकलना कठिन रहता है.

मैं इस चर्चा को सार्थक बनाने के लिए इसमें भाग लेने वाले सभी सांसदों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं.कई दशकों के बाद देश ने एक मजबूत जनादेश दिया है. एक सरकार को फिर से लाए हैं और पहले से ज्यादा शक्ति देकर लाए हैं: पीएम मोदी

पीएम (PM Modi) ने कहा कि आज के वैश्विक वातावरण में भारत को यह अवसर खोना नहीं चाहिए. देश की आकांक्षाओं को पूरा करने में आने वाली हर चुनौती को हम पार कर सकते हैं. इस चर्चा में लगभग 60 सांसदों ने हिस्सा लिया, जो पहली बार यहां चुनकर आए हैं.

इस प्रस्ताव का धन्यवाद देश की जनता का धन्यवाद है. एक सशक्त, सुरक्षित राष्ट्र का सपना हमारे देशवासियों ने देखा है. उसे पूरा करने के लिए अधिक गति के साथ हम सबको मिलकर आगे बढ़ना है.

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