‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने जल संरक्षण पर दिया ज़ोर।

मन की बात का यह कार्यक्रम लगभग चार महीने बाद हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों से स्वच्छता आंदोलन की तरह जल संरक्षण के लिए भी एक जन आंदोलन चलाने की अपील की।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद रविवार को पहली बार मन की बात (Mann Ki Baat) की। मन की बात का यह कार्यक्रम लगभग चार महीने बाद हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों से स्वच्छता आंदोलन की तरह जल संरक्षण (Water Conservation) के लिए भी एक जन आंदोलन चलाने की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ की मुख्य बातें

एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ और संवेदनशील व्यक्तियों की आवश्यकता होती है और योग यही सुनिश्चित करता है। असलिए योग का प्रचार-प्रसार समाज सेवा का एक महान कार्य है.

योग के क्षेत्र में योगदान के लिए Prime Minister’s Awards की घोषणा, अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी। यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है.

शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहां इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो। योग ने इतना बड़ा रूप ले लिया है.

21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियाँ, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया.

जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों, स्वयं सेवी संस्थाओं और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर व्यक्ति #JanShakti4JalShakti के साथ जानकारी शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके: पीएम मोदी

हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूँ .

जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें.

जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे.

जो भी पोरबंदर के कीर्ति मंदिर जायें वो उस पानी की टंकी को जरुर देखें। 200 साल पुरानी उस टांकी में आज भी पानी है और बरसात के पानी को रोकने की व्यवस्था है.

सामूहिक प्रयास से बड़े सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। पूरे देश में जल संकट से निपटने के लिए कोई फॉर्मूला नहीं हो सकता। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रयास किए जाने चाहिए.

पिछले कुछ महीनों में कई लोगों ने पानी से संबंधित मुद्दों के बारे में लिखा है। जल संरक्षण पर अधिक जागरूकता देखकर मुझे खुशी हुई.

मन की बात देश और समाज के लिए आईने की तरह है। ये हमें बताता है कि देशवासियों के भीतर अंदरूनी मजबूती, ताकत और टैलेंट की कोई कमी नहीं है.

जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, जेल के सलाखों तक, आन्दोलन सिमट नहीं गया था। जन-जन के दिल में एक आक्रोश था.

2019 कैा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लोखों शिक्षकों अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत से चुनाव संभव हुआ। इस महापर्व में 61 करोड़ लोगों ने मतदान किया.

चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था। हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे.

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