Bodo Agreement: PM Modi का असम दौरा आज, PM के स्वागत में दीयों से जगमगाया कोकराझार

पीएम मोदी हाल ही में हुए बोडो समझौते (Bodo Agreement) को लेकर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए असम के कोकराझार (Kokrajhar) का दौरा करेंगे।

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Kokrajhar – संसद से नागरिकता कानून (CAA) पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले असम दौरे पर आज यानी सात फरवरी को जा रहे हैं। पीएम मोदी हाल ही में हुए बोडो समझौते (Bodo Agreement) को लेकर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए असम के कोकराझार (Kokrajhar) का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोकराझार में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

इस जनसभा का आयोजन बोडो समझौता (Bodo Agreement) के उपलक्ष्य में किया गया है। बीटीएडी (बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स) जिलों- कोकराझार, बक्सा, उदलगुड़ी और चिरांग और पूरे असम के चार लाख से अधिक लोग इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें राज्य के जातीय समूहों का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल है।

बोडो शांति समझौते (Bodo Peace Agreement) और पीएम मोदी के स्वागत में असम के कोकराझार जिले में लोगों ने करीब 70 हजार दीयों को जलाकर अपनी खुशियों का इजहार किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसकी कुछ तस्वीरें अपने Twitter पर शेयर की हैं, जिसमें दिख रहा है कि पीएम मोदी के दौरे से पहले कोकराझार दीयों की जगमगाहट से खिल रहा है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के इस Tweet को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा- ‘थैंक्यू कोकराझार! मैं कल के कार्यक्रम का बेसब्री से इंतजार है।’

27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बोडो समझौता पर हस्ताक्षर किया गया था। समझौते के अनुसार, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के विभिन्न गुटों के लगभग 1615 कैडरों ने अपने हथियार डाल दिए और समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिनों के भीतर मुख्यधारा में शामिल हो गए। इस समझौते के तहत क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 1500 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज रखा गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समझौता असम के बोडो आदिवासियों (Bodo Tribals) को कुछ राजनीतिक अधिकार और कुछ आर्थिक पैकेज मुहैया कराएगा। असम की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रखी जाएगी तथा NDFFB की अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख मांग नहीं मांगी गई है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि समझौता राज्य के विभाजन के बिना संविधान की रूपरेखा के अंदर किया गया है। गृहमंत्री समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने को लेकर बहुत उत्सुक थे ताकि असम में बोडो उग्रवाद समाप्त किया जा सके।

बोडो (Bodo) असम का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है जो राज्य की कुल जनसंख्या का 5 से 6 प्रतिशत है। लंबे समय तक असम के बड़े हिस्से पर बोडो आदिवासियों का नियंत्रण रहा है। असम के चार जिलों कोकराझार, बाक्सा, उदालगुरी और चिरांग को मिलाकर बोडो टेरिटोरिअल एरिया डिस्ट्रिक्ट का गठन किया गया है। बोडो लोगों ने वर्ष 1966-67 में राजनीतिक समूह प्लेन्स ट्राइबल काउंसिल ऑफ असम के बैनर तले अलग राज्य बोडोलैंड बनाए जाने की मांग की। यह विरोध इतना बढ़ गया कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 के तहत NDFFB को गैर कानूनी घोषित कर दिया।

साल 1987 में ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन ने एक बार फिर से बोडोलैंड बनाए जाने की मांग की। यूनियन के नेता उपेंद्र नाथ ब्रह्मा ने उस समय असम को 50-50 में बांटने की मांग की। दरअसल, यह विवाद असम आंदोलन (1979-85) का परिणाम था जो असम समझौते के बाद शुरू हुआ। असम समझौते में असम के लोगों के हितों के संरक्षण की बात कही गई थी। दिसंबर 2014 में अलगाववादियों ने कोकराझार और सोनितपुर में 30 लोगों की हत्या कर दी। इससे पहले वर्ष 2012 में बोडो-मुस्लिम दंगों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और 5 लाख लोग विस्थापित हो गए थे।

समझौते के तहत उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के 1615 कैडर को 30 जनवरी को आत्मसमर्पण कर अपने हथियार सौंपने थे । इस दौरान कई उग्रवादी संगठन देश की मुख्याधारा में शामिल हो गए। उनके कैडर का पुनर्वास किया जाएगा। इसके तहत बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए तीन वर्षों में 1500 करोड़ रुपये का विकास पैकेज मिलेगा, जिससे विशिष्ट परियोजनाओं का आने वाले समय में क्रियान्वयन होगा। इस समझौते से बोडो टेरिटोरियल काउंसिल के क्षेत्र और शक्तियों का विस्तार होगा।

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