पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, कहा – ‘NPR लाने वाले ही फैला रहे अफवाह’

निराशा देश का भला कभी नहीं करती, इसलिए 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की बात का सुखद परिणाम यह हुआ कि जो विरोध करते हैं, उन्हें भी 5 ट्रिलियन डॉलर की बात करनी पड़ती है।

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लोकसभा में भाषण देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने राज्यसभा में भाषण दिया। पीएम मोदी ने कहा कि कई बातें नई-नई उभरकर आई हैं। ये सदन इस बात के लिए गर्व कर सकता है। एक प्रकार से पिछला सदन बहुत ही प्रोडक्टिव रहा। और सभी माननीय सदस्यों के कारण यह संभव हुआ और इसके लिए सभी सदस्य अभिनंदन के अधिकारी हैं।

ये अनुभवी और वरिष्ठ सदस्यों का सदन है। इससे देश के साथ-साथ मुझे भी काफी अपेक्षाएं थीं कि आपके पास से मुझे नए मार्गदर्शन मिलेंगे। आप जहां ठहर गए हैं, वहां से आगे बढ़ने का नाम नहीं लेते। कभी कभी तो लगता है कि पीछे चले जा रहे हैं। अच्छा होता है कि हताशा का माहौल बनाए बिना नए विचार, नई उर्जा मिलती। मगर आपने ठहराव को ही किस्मत बना लिया है।

पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें

NPR और जनगणना सरकार की सामान्य प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें पहले भी अंजाम दिया गया है। लेकिन जब वोटबैंक की राजनीति एक आवश्यकता है, तो जो लोग पहले एनपीआर को अंजाम देते थे, अब इसके बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं।

इस दशक में दुनिया की भारत से बहुत अपेक्षाएं हैं और भारतीयों को हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। इन अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए हम सभी के प्रयास 130 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप होने चाहिए।

क्योंकि आप विपक्ष में हैं तो आपके ही द्वारा किया गया NPR अब आपको बुरा लगने लगा है।

2003 में लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल प्रस्तुत किया गया। नागरिकता संशोधन बिल 2003 पर जिस संसद की स्थायी समिति ने चर्चा की और फिर उसे आगे बढ़ाया, उस कमेटी में कांग्रेस के अनेक सदस्य आज भी यहां बैठे हैं।

कई विपक्षी सदस्य इन दिनों बहुत उत्साहित हैं, जो लोग चुप थे वे हिंसक हो गए हैं।

क्या राष्ट्र को गुमराह करना और गलत जानकारी देना ठीक है? क्या कोई भी एक अभियान का हिस्सा हो सकता? कई विपक्षी दलों द्वारा CAA का समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण है।

सदन में CAA पर चर्चा हुई है। यहां बार-बार ये बताने की कोशिश की गई कि अनेक हिस्सों में प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाई गई, जो हिंसा हुई, उसी को आंदोलन का अधिकार मान लिया गया।

हमारे आदिवासी बच्चों में कई होनहार बच्चे होतें हैं, लेकिन अवसर नहीं होता है। हमने एकलव्य स्कूलों के द्वारा ऐसे बच्चों को अवसर देने का बहुत बड़ा काम किया है।

हमने मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं के समाधान को 100 फीसदी पूरा करने की दिशा में जाने का प्रयास किया है।

सभी घरों तक साफ पानी पहुंचाना हमारा मिशन है।

आज छोटे स्थानों पर डिजिटल ट्रांजैक्शन सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भी टियर-2, टियर-3 शहर आगे बढ़ रहे हैं।

जीएसटी को लेकर अगर इतना ही ज्ञान आपके पास था तो इसे लटकाए क्यों रखा था।

भारत को भारत की नजर से टूरिज्म को डेवलप करना चाहिए, पश्चिम की नजर से नहीं।

निराशा देश का भला कभी नहीं करती, इसलिए 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की बात का सुखद परिणाम यह हुआ कि जो विरोध करते हैं, उन्हें भी 5 ट्रिलियन डॉलर की बात करनी पड़ती है। मानसिकता तो बदली है हमने।

यहां अर्थव्यवस्था के विषय में चर्चा हुई। देश में निराश होने का कोई कारण नहीं है। अर्थव्यवस्था के जो बेसिक मानदंड हैं, उनमें आज भी देश की अर्थव्यवस्था सशक्त है, मजबूत है और आगे जाने की ताकत रखती है।

5 अगस्त 2019 का दिन आतंक और अलगाव को बढ़ावा देने वालों के लिए ब्लैक डे सिद्ध हो चुका है।

अब जम्मू-कश्मीर में पीएम पैकेज समेत अन्य कई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में पीएम आवास योजना के तहत मार्च 2018 तक सिर्फ 3.5 हजार मकान बने थे। 2 साल से भी कम समय में इसी योजना के तहत 24 हजार से ज्यादा मकान बने हैं।

सिर्फ 18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में डेढ़ लाख बुजुर्गों और दिव्यांगों को पेंशन योजना से जोड़ा गया है।

18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में 2.5 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ, 3 लाख 30 हजार घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया। 3.5 लाख से ज्यादा लोगों को आयुष्मान योजना के गोल्ड कार्ड दिए जा चुके हैं।

गवर्नर रूल के बाद 18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में 4400 से अधिक सरपंचों और 35 हजार से ज्यादा पंचों के लिए शांतिपूर्ण चुनाव हुआ।

पहली बार जम्मू-कश्मीर में एंटी करप्शन ब्यूरो की स्थापना हुई, पहली बार वहां अलगाववादियों के सत्कार की परंपरा समाप्त हो गई। पहली बार जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस और सेना मिलकर निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर फैसला लंबी चर्चा के बाद हुआ। वहां 4500 सरपंचों और 35 हजार पंचों के लिए शांतिपूर्ण मतदान हुआ। 18 महीने में जम्मू कश्मीर में ढाई लाख शौचालयों का निर्माण हुआ।

18 महीने में जम्मू कश्मीर में साढ़े तीन लाख से आयुष्मान भारत योजना के गोल्ड कार्ड दिए जा चुके हैं। वहां डेढ़ लाख बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग जनों को सरकार की पेंशन स्कीम से जोड़ा गया।

पुराने कारनामे इतनी जल्दी भूलते नहीं हैं। एक समय था जब दरवाजे बंद कर दिए गए थे। टीवी का चैनल बंद कर दिया गया था। आपको एक नया राज्य बनाने का अवसर मिला। उमंग उत्साह के साथ आप आगे बढ़ सकते थे। तेलंगाना के गठन के समय संसद के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।

गुलाम नबी आजाद जी ने कहा कि जम्मू कश्मीर का फैसला सदन में बिना चर्चा के हुआ। देश ने टीवी पर दिनभर चर्चा देखी है, सुनी है। देश ने देखा है कि व्यापक चर्चा हुई और विस्तार से चर्चा के बाद निर्णय किए गए हैं। सदन ने निर्णय किया। सम्मानीय सदस्यों ने अपना वोट देखकर निर्णय किया है।

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