पीएम मोदी ने पंजाब,हरियाणा के लोगों से की ये खास अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में कृषि उन्नति मेले की शुरुआत की. इसके साथ ही उन्होंने 25 कृषि विज्ञान केंद्रों की भी आधारशिला रखी. पीएम मोदी के अलावा इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे.

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस तरह के उन्नति मेले की न्यू इंडिया में जरूरत है. देश में आज हज़ारों किसान तकनीक की सहायता से आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज अनेक राज्य रिकॉर्ड उत्पादन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज देश में दूध, दाल, गेंहू का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है. हमारे देश का कृषि सेक्टर दुनिया को राह दिखाता है. उन्होंने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में अनाज उत्पादन की क्या स्थिति थी, संकट भरे उस दौर से हमारा अन्नदाता हमें बाहर निकालकर लाया है.

उन्होंने किसानों से पराली जलाना छोड़ने की अपील की, उन्होंने कहा कि धरती किसानों की मां है, उसे जलाइए मत. पीएम ने कहा कि पराली को मशीनों के जरिए हटाएं तो उसका खाद के तौर पर उपयोग बढ़ सकेगा. उन्होंने कहा कि जब हम Crop Residue को जला देते हैं तो ये सारे अहम तत्व जलकर हवा में चले जाते हैं. इससे प्रदूषण तो होता ही है, किसान की मिट्टी को भी नुकसान होता है.

मोदी ने समझाया MSP का पूरा गणित

पीएम मोदी ने कार्यक्रम में MSP के पूरे गणित को समझाया. उन्होंने कहा कि MSP के लिए जो लागत जोड़ी जाएगी, उसमें दूसरे श्रमिक के परिश्रम का मूल्य, अपने मवेशी-मशीन या किराए पर लिए गए मवेशी या मशीन का खर्च, बीज का मूल्य, सभी तरह की खाद का मूल्य, सिंचाई के ऊपर किया गया खर्च, राज्य सरकार को दिया गया लैंड रेवेन्यू वर्किंग कैपिटल के ऊपर दिया गया ब्याज, Lease ली गई जमीन के लिए दिया गया किराया, और अन्य खर्च शामिल हैं. इतना ही नहीं किसान के द्वारा खुद और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए श्रम के योगदान का भी मूल्य, उत्पादन लागत में जोड़ा जाएगा.

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बजट में सरकार ने ये भी ऐलान किया है कि ‘Farmer Producer Organizations’ को कॉपरेटिव सोसायटियों की तरह ही इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी. आज यहां जिन कृषि विज्ञान केंद्रों को पुरस्कार दिया गया है, उनमें से कई मधुमक्खी पालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. मधुमक्खी पालन सिर्फ कमाई ही नहीं, पूरी मानवता के साथ जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आइंस्टीन ने भी बताया था कि अगर मधुमक्खी ना रहे तो इंसान के लिए दिक्कतें पैदा होंगी. हमारी सरकार Waste To Wealth की दिशा में भी सार्थक प्रयास कर रही है.

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