राफेल पर जेपीसी जांच की मांग पर अड़े सांसद, विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर दिया धरना

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विपक्षी पार्टियां राफेल के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। यही वजह है कि शुक्रवार को मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस, आरजेडी, लेफ्ट और आम आदमी पार्टी ने संसद के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना दिया। इस धरने में विपक्षी सांसदों को यूपीए की चेयरपर्सन और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का भी साथ मिला। राज्यसभा के भीतर भी विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर जांच की मांग की।

कांग्रेस सांसदों ने गुरुवार को भी सभापति के आसन के पास धरना देकर राफेल के कथित घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग की। संसद में विश्वास मत के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील पर सवाल उठाए थे। इसके बाद फ्रांस सरकार की ओर से तुरंत सफाई आ गई। हालांकि, अब भी कांग्रेस राहुल गांधी के बयान के साथ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस का कहना है कि राफेल से जुड़ी ‘क्लासिफाइड’ और ‘कमर्शल’ जानकारी देने में फर्क है। कांग्रेस का कहना है कि फ्रांस सरकार की जो गोपनीयता की धारा है उसके अंदर विमान की कीमत छिपाना शामिल नहीं है।

राहुल ने संसद में कहा था कि राफेल डील में घपला हुआ है और विमानों की कीमत ज्यादा कर दी गई है। राहुल ने यह भी आरोप लगाया था कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल डील को लेकर देश से झूठ बोला है। हालांकि, इसपर फ्रांस ने राहुल के आरोपों को खारिज कर दिया था।

फ्रांस सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि 2008 के सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट के तहत दोनों देश गुप्त सूचना को सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। बयान में कहा गया, ‘हम कानूनी तौर पर इससे बंधे हुए हैं। डील की जानकारी सार्वजनिक करने से सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह प्रावधान 2016 में किए गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों पर भी लागू होता है।’

निरंजन कुमार

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