राजस्थान: कांस्टेबल परीक्षा के बहाने ‘आधार’ एक बार फिर सवालों के घेरे में

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आधार डेटाबेस के एक बार फिर लीक होने की खबरों के बीच UIDAI ने लोगों की पहचान को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए इसमें सेंध से इनकार किया है. दरअसल, पिछले कुछ दिन से ऐसी खबरें आ रही हैं कि गूगल पर ‘मेरा आधार, मेरी पहचान’ सर्च करने पर आधार की जानकारी निकल आती है. UIDAI ने हालांकि आगाह करते हुए कहा है कि ऑनलाइन सेवाएं लेते वक्त लोग सावधानी जरूर बरतें.

मुमकिन है, डेटाबेस पूरी तरह सुरक्षित हो लेकिन राजस्थान में ऑनलाइन कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कई नकलची गिरोह पकड़े गए हैं. उनसे हुई पूछताछ के बाद इस पर भरोसा करना असंभव लग रहा है. UIDAI का कहना है कि आधार की जानकारी हो जाने मात्र से किसी की पहचान को नहीं चुराया जा सकता क्योंकि बायोमीट्रिक्स मैच करना भी जरूरी है. लेकिन तब क्या हो जब आप घर बैठे हों और आपकी अंगुलियों के निशान से चोरी हो जाए ?

नकल गिरोहों ने ऐसी तरकीबें आजमाई हैं जिनको देखकर साइबर एक्सपर्ट भी हैरान हैं. बायोमीट्रिक मशीन को ‘बेवकूफ’ बनाने के लिए सिर्फ मोम की सहायता से अंगुलियों के निशान बदल दिए गए हैं. ये तरीके आजमाए गए हैं कांस्टेबल बनने के लिए, लेकिन अब इनसे आधार डेटाबेस के साथ ही पूरी साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं.

भर्ती परीक्षा कांस्टेबल कीसेंध लगेगी आधार में!

पुलिस कांस्टेबल के करीब 5500 पदों पर भर्ती के लिए राजस्थान पुलिस इन दिनों ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन कर रही है. 45 दिन तक चरणबद्ध रूप में चलने वाली ये परीक्षा अब सिरदर्द बनती जा रही है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हरियाणा से जुड़े ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो हाईटेक तरीके से नकल कर रहे थे. एक मामले में परीक्षा केंद्र के नेटवर्क को हैक करके बाहर से उत्तर दर्ज किए जा रहे थे.

थंबप्रिंट की क्लोनिंग कैसे?

यूनिक आइडेंटिफिकेशन यानी आधार को इसलिए कारगर माना जा रहा था क्योंकि ये बायोमीट्रिक अवयवों के आधार पर पहचान सुनिश्चित करता है. अभी तक माना जाता रहा है कि व्यक्ति की अंगुलियों की छाप की नकल दूसरा शख्स नहीं कर सकता. लेकिन अब ये भी गलत साबित हो गया है. कांस्टेबल परीक्षा में नकल करा रहे लोगों की चालाकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन्होने थंब प्रिंट तक का क्लोन भी तैयार कर लिया है.

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