राजस्थान में सियासी संकट: पायलट की जगह गोविंद सिंह डोटासरा को राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा

सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष दोनों से हटा दिया गया। उनके साथ-साथ दो और मंत्रियों को भी पद से हटाने का फैसला लिया गया है।

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राजस्थान में सियासी घमासान के बीच कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मौजूद 102 विधायकों ने डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) को दोनों पदों से हटाने का प्रस्ताव पास किया है। यह बैठक जयपुर के एक होटल में चल रही थी। आपको बता दें कि पार्टी की ओर से दूसरे दिन बुलाई गई विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट फिर शामिल नहीं हुए थे।

इसस पहले सचिन पायलट के खुलकर बागी तेवर अपना लेने के बाद कांग्रेस ने सोमवार सुबह जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई थी, लेकिन इसमें भी पायलट और उनके समर्थक विधायक नहीं पहुंचे थे। इस बैठक में शामिल विधायकों ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व में आस्था प्रकट की और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के प्रति समर्थन जताया।

सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष दोनों से हटा दिया गया। उनके साथ-साथ दो और मंत्रियों को भी पद से हटाने का फैसला लिया गया है। विश्वेन्द्र सिंह और रमेशचंद मीणा को मंत्री पद से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है। गोविंद सिंह दोतासरा को राजस्थान कांग्रेस को नया अध्यक्ष बनाया गया है।

जयपुर में आयोजित विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट (Sachin Pilot) का राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है। इसको लेकर विधायकों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 102 विधायक मौजूद हैं। उन्होंने एक स्वर में सचिन पायलट को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग।

राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मंगलवार को कहा कि पार्टी फिलहाल विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं कर रही है। फ्लोर टेस्ट के बारे में पूछे जाने पर पूनिया ने कहा, “वर्तमान में हम अभी कुछ भी नहीं मांग रहे हैं। हमारी प्राथमिकता यह थी कि यह एक भ्रष्ट सरकार है और इसने कोरोना वायरस संकट में कुप्रबंधन किया है। यह एक कमजोर सरकार बन गई है। पहली बात यह है कि इस सरकार को राज्य के लोगों के हित के बारे में सोचना चाहिए।”

जयपुर के फेयरमोंट होटल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हो रही है। इससे पहले सोमवार को, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 20 विधायक राज्य में राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अहमद पटेल, पी चिदंबरम और केसी वेणुगोपाल कई बार सचिन पायलट से बात कर चुके हैं। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि आज कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पायलट के शामिल होने की बहुत कम संभावना है।

राजस्थान राजनीतिक संकट पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘घर सजाने का तस्सवूर तो बहुत बाद में है, पहले ये तो तय करो कि घर को बचाएं कैसे। घर सजाना तब जब घर बचेगा। कांग्रेस पार्टी की लीडरशिप में नेगेटिविटी इतनी भरी हुई है कि उसका असर खुद उन्हें दिखाई पड़ रहा है।’

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस विधायक दल की बैठक बार-बार सचिन पायलट को यह संदेश भेजने के लिए की जा रही है कि अभी भी उनके वापस आने का समय है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व के रुख में अभी भी उनके लिए लचीलापन है। आगे की कार्रवाई के बारे में आज की बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा।

सूत्र ने यह भी बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अहमद पटेल, पी. चिदंबरम और केसी वेणुगोपाल ने कई बार सचिन पायलट से बात की है, लेकिन आज उनके सीएलपी में शामिल होने की संभावना कम है।

कांग्रेस ने दावा किया कि गहलोत सरकार को 109 विधायकों का समर्थन हासिल है। बैठक के बाद सभी विधायकों को बस से जयपुर के फेयर मॉन्ट होटल भेज दिया गया।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने सोमवार को कहा कि मंगलवार सुबह 10 बजे कांग्रेस विधायक दल की एक और बैठक होगी। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि बागी तेवर दिखा रहे पायलट एवं कुछ अन्य विधायक इस बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने कहा, ”एक बार फिर हम सचिन पायलट, सभी विधायक साथियों को लिखकर भी भेज रहे हैं। उनसे अनुरोध करते हैं कि आइए राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करें। राजस्थान को कैसे मजबूत करें, ये चर्चा करें। अगर किसी व्यक्ति विशेष से कोई मतभेद है तो खुले मन से वो भी कहिए, कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी सबकी बात सुनने और उसका हल निकालने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं।”

सोमवार सुबह हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पारित एक प्रस्ताव में पायलट की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए कहा गया है कि अगर कोई पार्टी पदाधिकारी या विधायक इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

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