पैंगोंग झील से कदम पीछे हटाने को मजबूर हुआ चीन

रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर चीन के साथ हुई वार्ता के दौरान भारत ने चीन को बताया कि वह तीन सिद्धांतों के आधार पर इस समस्या का समाधान चाहता है।

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संसद के ऊपरी सदन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच पीछे हटने पर सहमति बन गई है। पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर दोनों सेनाएं प्राथमिक पोस्ट पर तैनात सैनिकों को पीछे करेंगी। चीन जहां उत्तरी तट पर फिंगर 8 के पूर्व में जाएगा, वहीं भारतीय सेना फिंगर 3 के पास स्थित मेजर धान सिंह थापा पोस्ट (परमानेंट बेस) पर रहेगी। उन्होंने कहा कि पैंगोंग झील से सेनाओं के पूरी तरह से हटने के बाद, दोनों सेनाओं के बीच एक बार फिर बातचीत होगी। उन्होंने सेना के बहादुर जवानों की भी तारीफ की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेनाओं ने सभी चुनौतियों का डट कर सामना किया तथा अपने शौर्य एवं बहादुरी का परिचय दिया। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर चीन के साथ हुई वार्ता के दौरान भारत ने चीन को बताया कि वह तीन सिद्धांतों के आधार पर इस समस्या का समाधान चाहता है। उन्होंने कहा, ‘पहला, दोनों पक्षों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को माना जाए और उसका सम्मान किया जाए। दूसरा, किसी भी पक्ष द्वारा यथास्थिति को बदलने का एकतरफा प्रयास नहीं किया जाए। तीसरा, सभी समझौतों का दोनों पक्षों द्वारा पूर्ण रूप से पालन किया जाए।’

 रक्षा मंत्री ने सदन में कहा कि मुझे सदन को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे इस दृष्टिकोण तथा निरंतर वार्ता के फलस्वरूप चीन के साथ पैंगोंग झील के दक्षिण एवं पश्चिमी किनारे पर चीनी सेना के पीछे हटने का समझौता हो गया है। समझौता के अनुसार दोनों पक्ष फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट को चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से हटाएंगे। उन्होंने कहा, ‘पैंगोंग झील को लेकर हुए समझौते के मुताबिक चीन अपनी सेना को फिंगर 8 से पूर्व की ओर रखेगा। इसी तरह भारत भी अपनी सेना को फिंगर 3 के पास अपने परमानेंट बेस पर रखेगा।’

सदन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई क्षेत्रों को चिन्हित कर हमारी सेनाएं वहां मौजूद हैं।’ भारतीय सेनाएं अत्यंत बहादुरी से लद्दाख की ऊंची दुर्गम पहाड़ियों तथा कई मीटर बर्फ के बीच में भी सीमाओं की रक्षा करते हुए अडिग हैं और इसी कारण हमारा एज बना हुआ है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘सैन्य और राजनयिक स्तर पर हमारी बातचीत हुई है। हमने तीन सिद्धांतों पर जोर दिया है।’

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस बातचीत में हमने कुछ भी खोया नहीं है। सदन को यह जानकारी भी देना चाहता हूं कि अभी भी एलएसी पर डिप्लॉयमेंट तथा पेट्रोलिंग के बारे में कुछ बकाया मुद्दे बचे हैं। इन पर हमारा ध्यान आगे की बातचीत में रहेगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि द्विपक्षीय समझौता तथा प्रोटोकॉल के तहत पूर्ण डिसइंगेजमेंट जल्द से जल्द कर लिया जाए। चीन भी देश की संप्रभुता की रक्षा के हमारे संकल्प से अवगत है। यह अपेक्षा है कि चीन द्वारा हमारे साथ मिलकर बचे हुए मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जाएगा।’

रक्षा मंत्री ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता में किसी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति का हमारी द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। हमारी सशस्त्र सेनाओं द्वारा भारत की सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त तथा प्रभावी काउंटर तैनाती की गई है। एलएसी तथा सीमाओं पर शांति और स्थिरता कायम रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राजनाथ ने कहा, मुझे यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि भारतीय सेनाओं ने इन सभी चुनौतियों का डट कर सामना किया है तथा अपने शौर्य एवं बहादुरी का परिचय पैंगोंग त्से के साउथ एवं नॉर्थ किनारे पर दिया है। हमारी सेनाओं ने यह साबित करके दिखाया है कि भारत की संप्रभुता एवं अखंडता की रक्षा करने में वे सदैव हर चुनौती से लड़ने के लिए तत्पर हैं और अनवरत रहे हैं।

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