सुप्रीम कोर्ट का उत्तर प्रदेश सरकार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर 24 घंटे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का आदेश

घटना को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए अदालत ने इस हिंसा में मारे गये एक किसान की बीमार मां को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर 24 घंटे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया। भारत के चीफ जस्टिस (CJI) एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि पत्रकार समेत सभी हत्याओं के आरोपियाें की गिरफ्तारी का विवरण रिपोर्ट में होना चाहिये। घटना को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए अदालत ने इस हिंसा में मारे गये एक किसान की बीमार मां को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया। एडवोकेट अमृत पाल सिंह खालसा द्वारा उनकी हालत के बारे में बताने के बाद अदालत ने राज्य सरकार से कहा, ‘उन्हें तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में दाखिल करायें।’

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा कि निर्देशों का तुरंत पालन होगा। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और एक एसआईटी जांच कर रही है। अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जांच आयोग भी गठित कर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवीर प्रताप शर्मा ने स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप की मौत का मामला उठाया। अदालत ने अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय करते हुए राज्य सरकार से कहा कि रिपोर्ट में सब कुछ शामिल होना चाहिये।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में बीते रविवार प्रदर्शन के दौरान 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत को लेकर 2 वकीलों- शिव कुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा की तरफ से सीजेआई को लिखे पत्र के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई शुरू की है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी अदालत से मामले पर संज्ञान लेने का आग्रह किया था। सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि पत्र को जनहित याचिका (पीआईएल) के तौर पर पंजीकृत किया जाना था, लेकिन कुछ गलतफहमी की वजह से इसे स्वत: संज्ञान के मामले के तौर पर सूचीबद्ध कर दिया गया। पीठ ने कहा, ‘कोई फर्क नहीं पड़ता, हम तब भी इस पर सुनवाई करेंगे।’ बृहस्पतिवार सुबह सुनवाई शुरू होने पर दोनों वकील इसमें शामिल नहीं हुए, हालांकि दोपहर बाद दोबारा सुनवाई के दौरान वह इससे जुड़े। इंटरनेट कनेक्शन में दिक्कत के कारण त्रिपाठी ज्यादा कुछ नहीं कह पाये। उन्होंने राज्य में किसानों के मानवाधिकार हनन की शिकायत करते हुए कहा कि मामले की उचित जांच होनी चाहिये।

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