आसियान सम्मेलन में उठा रोहिंग्या संकट का मुद्दा, आंग सान सू की ने मांगी आसियान राष्‍ट्रों से मदद

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सिडनी में आसियान शिखर सम्मेलन में रोहिंग्या संकट का मुद्दा उठाया गया, लेकिन क्षेत्रीय संगठन ने जोर दिया कि वह हस्तक्षेप नहीं करेगा और नतीजे पर दबाब नहीं बनाएगा. दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन दिवसीय विशेष सम्मेलन के महत्वपूर्ण मुद्दों में मानवीय संकट भी छाया रहा. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल ने रविवार को कहा कि हमने रखाइन प्रांत में स्थिति पर चर्चा की. आंग सान सू की ने भी प्रमुखता से मुद्दे को संबोधित किया है. गौरतलब है कि सेना के बर्बर अभियान के बीच म्यांमार की नेता आंग सान सू की सार्वजनिक चुप्पी के लिए वैश्विक स्तर पर उनकी काफी आलोचना हुयी थी. फौज के दमन के कारण मुस्लिम अल्पसंख्यकों को म्यांमार के रखाइन प्रांत से बांग्लादेश जाना पड़ा था.

म्यांमार के पड़ोसी मौजूदा स्थिति के लिए चिंतित
इस साल आसियान के अध्यक्ष सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कहा कि म्यांमार के पड़ोसी मौजूदा स्थिति के लिए चिंतित हैं, लेकिन नतीजे के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता. दोनों नेताओं ने कहा कि वे संकट के समाधान के लिए दीर्घावधि प्रयासों पर जोर देंगे और विस्थापित हुए लोगों को मानवीय मदद का समर्थन करते हैं. मलेशिया के नेता नजीब रज्जाक ने शनिवार को सुकी पर यह कहते हुए दबाव बढ़ा दिया कि रोहिंग्या संकट से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है. म्यांमार की पूर्व सरकार के तहत लोकतंत्र स्थापित करने की सक्रियता के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सू की किसी समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों का तारा थीं लेकिन रोहिंग्या मुस्लिमों के मुद्दे पर चुप्पी को लेकर कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने उनकी आलोचना की थी.

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