आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जिनको राम मंदिर बनाना है, उनको पहले खुद राम बनना पड़ेगा

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चुनावों का मौसम नजदीक है। ऐसे में एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश के छतरपुर में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर बयान दिया है। छतरपुर के मऊसहानियां में बुधवार को महाराजा छत्रसाल की 52 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे भागवत ने राम मंदिर का संकल्प दोहराया।

संघ प्रमुख ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण सिर्फ इच्छा नहीं, संकल्प है। राम मंदिर बनाने वालो को कुछ न कुछ करना होगा। राम मंदिर निर्माण कब होगा मूल प्रश्न यही है, इस निमित्त हमें अपने आप को तैयार करना होगा।

मोहन भागवत ने वर्तमान समय को राम मंदिर निर्माण का सबसे अनुकूल समय बताते हुए कहा, ‘राम मंदिर बनने के लिए समय अनुकूल है, इसलिए राम मंदिर बनाने वालों को राम जैसा बनना पड़ेगा। तभी यह कार्य संभव है।

आरएसएस के सरसंघ चालक ने कहा कि महाराज छत्रसाल ने समाज के सब लोगों को जोड़कर अपने साम्राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि महाराज छत्रसाल शिवाजी महाराज के पास पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि छत्रसाल ने प्रजा के बीच भेद उत्पन्न करने वाले दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए उनकी सेना में शामिल होने का मन बनाया था। पर, शिवाजी ने महाराज छत्रसाल को अपने परिश्रम से प्रजा की रक्षा करने के लिए वापस कर दिया था।

सोशल मीडिया से दूर रहते हैं भागवत
जहां एक तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सोशल मीडिया पर खुलकर अपना प्रचार करती है, वहीं दूसरी तरफ मोहन भागवत सोशल मीडिया से दूर ही रहते हैं।

मोहन भागवत न तो ट्विटर पर हैं और न ही फेसबुक पर उनका कोई अकाउंट है। यही नहीं मोहन भागवत ने सोशल मीडिया पर न होने के तर्क भी दिए हैं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया आपको अहंकारी और आत्म-केंद्रित बना सकता है।

मोहन भागवात ने कहा है कि सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां मैं, मेरा और अपने के बारे बात की जाती है। कई बार सोशल मीडिया के जरिए आपको कई तरह की गलतफहमियां हो जाती हैं यहां तक कि आप अपनों को भी गलत समझने लगते हैं।

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