जहां की सड़कों पर बसें जल रही हों, वहां कौन निवेश करेगा – सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव

सद्‌गुरु (Sadhguru Jaggi Vasudev) का यह बयान उस समय आया है, जब भारत में नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) का पुरजोर विरोध हो रहा है.

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स्विट्जरलैंड के दावोस (Davos) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) का आयोजन किया जाता है. WEF की 50वीं बैठक 20 जनवरी से शुरू हो चुकी है और यह 24 जनवरी तक चलेगी. इस कार्यक्रम में भारत समेत कई देशों की हस्तियां शिरकत कर रही हैं. दुनियाभर के करीब 3000 प्रतिनिधि इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) कर रहे हैं. उनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री मनसुख लाल मंडाविया (Mansukh L. Mandaviya), मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (CM Kamal Nath), कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) समेत कुछ दिग्गज कारोबारी, फिल्मी हस्तियां और ईशा फाउंडेशन के अध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरु सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव (Sadhguru Jaggi Vasudev) भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं.

सद्‌गुरु ने नागरिकता कानून (CAA) को लेकर भारत में हो रहे विरोध पर कहा, ‘कोई भी उस जगह पर निवेश नहीं करेगा, जहां की सड़कों पर बसें जल रही हों.’

सद्‌गुरु (Sadhguru Jaggi Vasudev) ने कहा, ‘जब कुछ जगहों पर बसें जल रही हों तो उस जगह की छवि वैसी ही बन जाती है. हालांकि ये बहुत छोटी बात है लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि छोटी बात, तो ये पूरे देश को लेकर नहीं है, ये सिर्फ कुछ जगहों पर हो रहा है. हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते. एक राष्ट्र के तौर पर ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी छवि को बिगड़ने न दें क्योंकि बगैर विदेशी निवेश के हम देश में वो हासिल नहीं कर सकते जो हम करना चाहते हैं. भारतीय होने के नाते ये हमारा फर्ज है कि हम दुनिया को दिखाएं कि हमारा देश निवेश के लिए सबसे सुरक्षित है.’

गौरतलब है कि सद्‌गुरु (Sadhguru Jaggi Vasudev) का यह बयान उस समय आया है, जब भारत में नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) का पुरजोर विरोध हो रहा है. साथ ही द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) द्वारा 2019 के लिए तैयार की गई लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक सूची में भारत 10 अंक लुढ़ककर 51वें स्थान पर आ गया है. दूसरी ओर IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) का कहना है कि भारतीय GDP में गिरावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘देश के जनादेश के साथ अधिक व्यापक रूप से निवेश को प्रोत्साहित करना जरूरी हो चला है. हमें भारत में घरेलू निवेश को फिर से दुरुस्त करने की जरूरत है, खपत खर्च कमजोर है. इसलिए मुझे लगता है कि भारत के माहौल को ज्यादा से ज्यादा निवेश के लिए तैयार करना होगा क्योंकि अगर निवेश बढ़ेगा तो यह भारत के संभावित विकास को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा.’

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