जो मुझे ठीक से नहीं जानते हैं, वे मुझे नसीहत ना दें – सलमान खुर्शीद

कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को लेकर अपनी ही पार्टी की आलोचना कर चुके सलमान खुर्शीद ने एक बार फिर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की जरुरत बताई है।

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कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को लेकर अपनी ही पार्टी की आलोचना कर चुके सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने एक बार फिर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अध्यक्ष बनाए जाने की जरुरत बताई है। अपने हालिया बयान को लेकर पार्टी के अन्य नेताओं की टिप्पणी पर भी उन्होंने खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने कहा है कि जो मुझे ठीक से नहीं जानते हैं, वे मुझे नसीहत ना दें।

राहुल गांधी के इस्तीफे को लेकर सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने पिछले दिनों कहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद हमने एकजुट होकर समीक्षा भी नहीं की और हमारे नेता (राहुल) हमे छोड़ गए। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी की वर्तमान स्थिति जैसी है, वैसे में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए जीतना संभव नहीं है।

उनके बयान के बाद पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने कहा था कि लोगों को इस तरह की टिप्पणियां करने की जगह भाजपा सरकार की गलतियां उजागर करनी चाहिए। खुर्शीद के बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और अधीर रंजन चौधरी ने भी आपत्ति जताई थी। राशिद अल्वी ने उन्हें घर को आग लगाने वाला चिराग करार दिया था, जबकि अधीर रंजन चौधरी ने उन्हें बाहर बोलने की बजाय पार्टी के भीतर ही अपनी राय रखने की सलाह दी थी।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद सलमान खुर्शीद ने एक लंबा फेसबुक पोस्ट लिखा है। उन्होंने कहा है कि जो उन्हें नहीं जानते, वे उन्हें नसीहत न दें। पूर्व विदेश मंत्री ने अपनी ही पार्टी के नेताओं की टिप्पणी पर कहा कि मैं हैरान हूं कि मुझे वो लोग नसीहत दे रहे हैं जो मेरी निजी वफादारी और राजनीतिक रणनीति के बारे बहुत मामूली जानते हैं। इसलिए मैं हमेशा के लिए उन्हें यह बताना चाहता हूं कि विश्वास और निष्ठा निजी पसंद से जुड़ी होती है।

सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने कहा है कि राहुल गांधी को एक बार फिर पार्टी की कमान संभालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भाजपा नहीं बनना चाहिए और अपना अलग नजरिया और सोच बिना किसी डर के लोगों के समक्ष रखना चाहिए।

सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने कहा कि उन्हें निजी सम्मान की समझ है, इतिहास और लोकतंत्र की भी समझ है, इसलिए वह गांधी परिवार का समर्थन करते हैं। कहा कि महत्वपूर्ण क्षणों में रणनीतिक मौन उचित है लेकिन साथ ही आवाज उठाते रहना भी हमारे सामूहिक भविष्य के लिए जरूरी है।

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