SC/ST एक्ट के पुराने प्रावधानों को कैबिनेट से मंजूरी

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SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दलित संगठनों और विपक्षी दलों के हमले झेल रही नरेंद्र मोदी सरकार ने इस बिल के पुराने मसौदे को एकबार फिर संसद में पेश करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए बुधवार को दलितों को किसी भी तरह के अत्याचार से बचाने के लिए प्रावधानों को बहाल करने वाले विधेयक को पेश करने की मंशा जता एक तीर से कई निशाने साधे हैं। सत्तारूढ़ पार्टी ने जहां इस विधेयक से विपक्षी हमलों और 9 अगस्त को प्रस्तावित दलित आंदोलन की हवा निकालने की कोशिश की है इससे दलितों की नाराजगी को इससे कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पार्टी ने एलजेपी जैसे सहयोगी दलों को भी साधने का प्रयास किया गया है। बीजेपी ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए आज और कल के लिए विप जारी किया है।

मोदी सरकार संसद के मॉनसून सत्र में ही इस विधेयक को पेश करने वाली है। इसे अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले दलितों को लुभाने की सरकार की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उलट एससी-एसटी अपराध में जमानत के प्रावधान को खत्म करने का फैसला किया है।

सरकार ने यह विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में ही लाने और पास कराने का प्लान बनाया है। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के चलते इस विधेयक का कोई पार्टी विरोध करेगी लेकिन ऐसा नहीं लगता। इस संशोधन विधेयक से बीजेपी को अपनी दलित विरोधी और सिर्फ अगड़ी जातियों के प्रति समर्पित पार्टी की छवि को तोड़ने में मदद मिल सकती है। दलितों पर अत्याचार की घटनाओं में कथित बढ़ोतरी को लेकर पिछले कुछ महीनों से बीजेपी को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही थी।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानून के तहत उचित जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद दलित हितों की रक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को देश भर में दलित संगठनों ने काफी बड़ा आंदोलन भी किया था। आंदोलन इतना उग्र था कि सरकार को इस मामले में अध्यादेश लाने का मन भी बनाना पड़ा था। हालांकि सरकार अब इस मसले पर विधेयक ला रही है।

दलित संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह 9 अगस्त को फिर आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर जाएंगे। पिछले हफ्ते सरकार की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने भी दलितों की मांग मानने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोयल को एनजीटी के चेयरमैन पद से हटाने की मांग भी कर रहे हैं। जस्टिस जज उन दो जजों में से एक हैं, जिन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के संबंध में आदेश दिया था।

एससी-एसटी ऐक्ट को पुराने स्वरूप में कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद बीजेपी के सहयोगी दलों और पार्टी के दलित नेताओं ने पीएम नरेन्द्र मोदी की सराहना भी की है। एलजेपी चीफ प्रमुख राम विलास पासवान ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख एवं केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि यह विधेयक पीएम मोदी की समाज के वंचित एवं शोषित वर्ग को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एलजेपी नेता चिराग पासवान ने पीएम का शुक्रिया अदा किया।

निरंजन कुमार

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