मंझा हुआ अभिनय था; राज्यसभा में आजाद के लिए पीएम मोदी के भावुक होने पर शशि थरूर ने ऐसे कसा तंज

शशि थरूर ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की विदाई के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भावुक भाषण को 'मंझा हुआ अभिनय' करार दिया।

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राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद की विदाई के मौके पर तारीफ करते हुए भावुक हो गए। इस पर अब कांग्रेस नेता शशि थरूर की प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की विदाई के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भावुक भाषण को ‘मंझा हुआ अभिनय’ करार दिया।

पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पुस्तक ‘बाई मेनी ए हैपी एक्सीडेंट: रिकलेक्सन ऑफ ए लाइफ’ पर आयोजित परिचर्चा में शशि थरूर ने कहा, ‘यह बहुत मंझा हुआ अभिनय था। यह आंशिक रूप से (किसान नेता) राकेश टिकैत के जवाब में था। उन्होंने फैसला किया कि उनके पास भी आंसू हैं।’ बता दें कि राकेट टिकैत हाल ही में किसान आंदोलन को लेकर भावुक हो गए थे।

दरअसल, मंगलवार को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का उच्च सदन में कार्यकाल पूर्ण हो गया और उन्हें विदायी दी गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें एक बेहतरीन मित्र बताते हुए कहा ”सदन के अगले नेता प्रतिपक्ष को आजाद द्वारा स्थापित मानकों को पूरा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। आजाद ने अपने दल की चिंता जिस तरह की, उसी तरह उन्होंने सदन की और देश की भी चिंता की।’ उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के पद पर रहते हुए आजाद ने कभी दबदबा स्थापित करने का प्रयास नहीं किया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब आजाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे। उन दिनों कश्मीर में पर्यटकों पर आतंकी हमला हुआ और कुछ पर्यटक मारे गए थे। इनमें गुजरात के पर्यटक भी थे। तब सबसे पहले, गुलाम नबी आजाद ने फोन कर उन्हें सूचना दी और उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। मैंने तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी से पर्यटकों के पार्थिव शरीर लाने के लिए सेना का हवाई जहाज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जो उन्होंने स्वीकार कर लिया। रात को पुन: आजाद ने फोन किया। यह फोन उन्होंने हवाईअड्डे से किया और उनकी चिंता उसी तरह थी जिस तरह लोग अपने परिवार की चिंता करते हैं। यह बोलते हुए प्रधानमंत्री का गला रुंध गया।

पीएम मोदी ने कहा ‘मेरे लिए बहुत भावुक पल था। अगले दिन सुबह पुन: आजाद का फोन आया और उन्होंने पूछा कि मोदी जी, क्या सभी पहुंच गए। ‘उन्होंने कहा ‘एक मित्र के रूप में घटनाओं और अनुभव को देखते हुए मैं आजाद का बहुत आदर करता हूं।’ प्रधानमंत्री ने कुछ यादें साझा करते हुए कहा कि जब वह कोविड-19 महामारी पर सदन में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाने पर विचार कर रहे थे तब आजाद ने फोन कर उन्हें सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाने का सुझाव दिया था। मोदी ने कहा, ”मैंने वह सुझाव माना और वह सुझाव उपयोगी रहा।

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