सनी देओल के आने से पंजाब का चुनावी माहौल हुआ गर्म।

सनी देओल के नाम का एलान होते ही पंजाब के चुनावी माहौल में गर्मी आ गई है। कांग्रेस गुरदासपुर को काफी सेफ सीट मानकर चल रही थी लेकिन सनी देओल के आने के बाद उसके लिए चुनौती बढ़ गई है।

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Lok Sabha Election: बॉलीवुड के दमदार कलाकार सनी देओल के चुनावी मैदान में कूदने से पंजाब की चुनावी लड़ाई अब दिलचस्‍प हो गई है। कांग्रेस को पिछले सप्ताह तक ऐसा लगता था कि वह बड़े आराम से पंजाब की अधिकतर सीटों पर जीत हासिल कर लेगी, लेकिन अब उसकी राह उतनी आसान नहीं लग रही है। सनी देओल (Sunny Deol) व सुखबीर बादल जैसे दिग्गजों के मैदान में उतरने से उसकी चुनौती बढ़ गई है, वहीं टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में पैदा हुई गुटबाजी भी बड़ी समस्या बन गई है।

सनी देओल के नाम का एलान होते ही पंजाब के चुनावी माहौल में गर्मी आ गई है। कांग्रेस गुरदासपुर (Gurdaspur) को काफी सेफ सीट मानकर चल रही थी लेकिन सनी देओल (Sunny Deol) के आने के बाद उसके लिए चुनौती बढ़ गई है।

भाजपा ने इस चुनाव में राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाया हुआ है और सनी देओल का कई फिल्मों में जो किरदार रहा है वह इसके अनुकूल है।

वैसे भी सनी देओल का जन्म लुधियाना के साहनेवाल में हुआ है और पंजाब में उनके काफी प्रशंसक हैं। सनी देओल के आने का असर भाजपा कोटे की दो अन्य सीटों अमृतसर व होशियारपुर पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा अकाली दल को भी इसका लाभ मिलना तय है, क्योंकि भाजपा के साथ उसका गठबंधन है।

लोकसभा चुनाव की घोषणा के डेढ़ माह बाद अकाली दल ने बठिंडा, फिरोजपुर और भाजपा ने गुरदासपुर व होशियारपुर सीट पर उम्मीदवार फाइनल किए हैं। कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है, कैप्टन अमरिंदर कुछ सीटों पर उनकी पसंद के उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से नाराज बताए जाते हैं।

गुरदासपुर सीट से कांग्रेस के प्रदेश प्रधान और मजबूत उम्मीदवार सुनील जाखड़ को टक्कर देने के लिए सिने स्टार सनी देओल को भाजपा ने मैदान में उतार दिया। सनी देओल कौन हैं यह बताने के लिए भाजपा को अधिक मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरा, जब भी पार्टी ने इस सीट पर फिल्मी सितारे को उतारा है एक बार को छोड़कर उन्हें सफलता ही मिली है। बॉलीवुड स्टार विनोद खन्ना ने कांग्रेस की सुखबंस कौर भिंडर का अभेद किला भी ढहाया था।

विनोद खन्ना यहां से 1998 के चुनाव में सुखवंश सिंह भिंडर को 1.07 लाख वोट के अंतर से हराकर अपना परचम फहराने में सफल रहे थे, जो लगातार तीन संसदीय चुनाव तक कायम रहा। वह 1998 के बाद 1999 और 2004 का चुनाव भी जीते, लेकिन 2009 में वह हार गए। 2014 में एक बार फिर से जीत का स्वाद चखा, लेकिन जिंदगी की लड़ाई हार गए।

भाजपा ने यहां से विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई सीट पर करवाए गए उपचुनाव में स्वर्ण सिंह सलारिया को खड़ा किया, लेकिन वह सुनील जाखड़ से करीब दो लाख मतों के अंतर से हार गए। पार्टी को लगा कि यहां से पार्टी काडर का उम्मीदवार नहीं जीत सकता तो उन्होंने एक बार फिर से फिल्मी सितारे पर दांव आजमाया है।

Sunny Deol के आने से गुरदासपुर (Gurdaspur) में पार्टी में चल रही गुटबाजी भी दूर होगी। कांग्रेस के लिए यहां पहले लड़ाई आसान मानी जा रही थी, लेकिन अब सनी के आने से मुकाबला कांटे का होगा क्योंकि इस सीट पर एक लाख से ज्यादा ईसाई वोट हैं और आम आदमी पार्टी ने यहां से पीटर मसीह को टिकट दिया है, अगर वह इस समुदाय के ज्यादा वोट ले जाते हैं तो जाखड़ के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

होशियारपुर में भाजपा ने मौजूदा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला का टिकट काटकर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और मौजूदा विधायक सोमप्रकाश को टिकट देकर नया दांव चला है। यहां से सांपला की टिकट काटकर सोमप्रकाश को देने में पार्टी को खासी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि पार्टी का एक वर्ग चाहता था कि विजय सांपला की जगह सोमप्रकाश को टिकट दी जाए, वहीं एक गुट चाहता था कि सांपला को ही टिकट मिले। सांपला पर बाबा रामदेव का भी हाथ रहा है।

अमृतसर में भाजपा का दांव उलटा पड़ सकता है। पार्टी ने यहां भी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हरदीप पुरी को टिकट दिया है। वह मूल रूप से अमृतसर के ही रहनेवाले हैं, लेकिन पिछले कई सालों से दिल्ली में रह रहे हैं। अमृतसर सीट भी कई सालों तक कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया के कब्जे में रही है जिसे क्रिकेट की दुनिया से पॉलिटिक्स की दुनिया में लौटकर नवजोत सिंह सिद्धू ने तोड़ा और यहां से लगातार तीन बार जीत दर्ज की। 2014 में उनकी सीट कटने से वह नाराज हो गए और कांग्रेस में शामिल हो गए। भाजपा को लग रहा है कि यहां से सिख उम्मीदवार को खड़ा करने से सफलता मिल जाएगी। पिछली बार यहां से अरुण जेटली लड़े थे, जिन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक लाख से ज्यादा मतों से हराया।

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