सुप्रीम कोर्ट ने मानी केंद्र सरकार की बात, राष्ट्रहित में हम रामसेतु को बचाएंगे

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शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में उन्होंने भारत सरकार की सेतु समुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट से राम सेतु को संभावित नुकसान का मुद्दा रखा था. अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वो राष्ट्र हित को ध्यान में रखते हुए वो राम सेतु को कोई नुकसान न पहुंचे इसका ख्याल रखेगी.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को सूचित किया कि वह राष्ट्रहित में रामसेतु को बचाएगा और अपने सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के तहत इस पौराणिक सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुचाई जाएगी.

इस बाबत स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, ‘मैं जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख करूंगा ताकि वो केंद्र सरकार को राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने के लिए आदेश दे.’ स्वामी ने ट्वीट कर कहा, ‘आज सुप्रीम कोर्ट को सरकार ने बताया कि राम सेतु को छुआ नहीं जाएगा. मैंने 20 साल बाद अपने 2006 के डब्ल्यूपी नंबर 26 और 27 में स्थानांतरित सूचीबद्ध मामले में निष्कर्ष निकाल लिया है.’

मंत्रालय द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया, ‘भारत सरकार राष्ट्र के हित में रामसेतु को बिना प्रभावित किए/नुकसान पहुंचाए ‘सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट’ के पहले तय किए एलाइंमेंट के विकल्प खोजने को इच्छुक है.’

केंद्र का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि केंद्र ने पहले दिए निर्देशों का अनुसरण करते हुए जवाब दाखिल की है और अब याचिका खारिज की जा सकती है.

भारत सरकार ने 1990 में सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा था. और इस प्रोजेक्ट के व्यवहार्ता अध्ययन के आदेश दिए गए.

1997 में सरकार ने प्रोजेक्ट की शुरूआत करने का निर्णय लिया लेकिन पूरा प्रोजेक्ट 2005 तक फाइनल हो पाया. इस प्रोजेक्ट के पीछे सरकार का लक्ष्य जहाजों की यात्रा को 350 नॉटिकल मील कम करके लगने वाले समय को 10-13 घंटे तक कम करना था. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत और श्रीलंका में 13 छोटे बंदरगाह और कई फिशिंग हार्बर बनाने की योजना थी.

लेकिन बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने धार्मिक भावनाओं से जुड़े राम सेतु को नुकसान पहुंचने की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके इसके लिए राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की थी.

एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाने वाला राम सेतु समुद्र के अंदर लाइमस्टोन से बनी हुई एक पुल जैसी रचना है, जो रामेश्वर के पास के पाम्बान द्वीप के पास लेकर श्रीलंका के उत्तरी तट के पास स्थित मन्नार द्वीप तक फैला हुआ है.

इस रचना को लेकर भूविज्ञान में बहुत सी व्याख्याएं की गई हैं लेकिन भारत में हिंदूओं का इस बारे में पौराणिक मत है. हिंदू मानते हैं कि भगवान श्री राम लंका (आज के श्रीलंका) के राजा से लड़ाई के लिए अपनी वानर सेना की ओर से बनाए इस पत्थरों के पुल को पार किया था.

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