भारत के मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर RTI कानून के दायरे में आएगा – सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि CJI दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय हैं इसलिए यह RTI के दायरे में आएगा।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को सूचना का अधिकार के कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा है कि CJI दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह RTI के दायरे में आएगा।

सीजेआई रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि CJI दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय हैं इसलिए यह RTI के दायरे में आएगा।

पीठ में सीजेआई समेत जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना उस याचिका पर अपना फैसला सुनाया जिसमें सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के जनवरी 2010 में आए फैसले को चुनौती दी थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि CJI का दफ्तर एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और इसे सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। पीठ ने इस साल अप्रैल में इस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सीजेआई रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने पहले यह कहा था कि पारदर्शिता के नाम पर एक संस्था को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। नवंबर 2007 में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने आरटीआई याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से जजों की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी जो उन्हें देने से इनकार कर दिया गया।

अग्रवाल इसके बाद सीआईसी के पास पहुंचे और सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट से इस आधार पर सूचना देने को कहा कि सीजेआई का दफ्तर भी कानून के अंतर्गत आता है। इसके बाद जनवरी 2009 में सीआईसी के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई हालांकि वहां भी CJI के आदेश को कायम रखा गया।

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