Supreme Court-संस्था को बदनाम करने के लिए सोचा समझा खेल खेला जा रहा है।

कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ षड्यंत्र को लेकर कहा कि अब समय आ गया है कि हम खड़े हों और देश के अमीर एवं ताकतवर लोगों को बताएं कि वे ऐसा नहीं कर सकते।

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मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई में अदालत ने कहा कि अमीर और शक्तिशाली इस अदालत को नहीं चला सकते हैं। कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ षड्यंत्र को लेकर वकील के दावों पर कहा कि अब समय आ गया है कि हम खड़े हों और देश के अमीर एवं ताकतवर लोगों को बताएं कि वे ऐसा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि चार से पांच प्रतिशत वकील ऐसे हैं जो इस महान संस्था को बदनाम कर रहे हैं।

कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ षड्यंत्र संबंधी वकील के दावों पर कहा कि इस संस्था को बदनाम करने के लिए एक सोचा समझा हमला किया जा रहा है और सोचा समझा खेल खेला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से इस संस्था से पेश आया जा रहा है, हम उससे नाराज हैं… यदि ऐसा होगा तो हम काम नहीं कर पाएंगे।

इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में विशेष पीठ ने कहा कि वह एक अधिवक्ता के इस दावे की तह तक जाएगी कि मुख्य न्यायाधीश को यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसाने के लिए एक बड़ी साजिश रची गई। तह तक पहुंचने के लिए जांच करते रहेंगे।

जस्टिस अरुण मिश्रा, आर एफ नरीमन और दीपक गुप्ता की विशेष पीठ ने कहा कि हम बिचौलियों के सक्रिय होने और न्यायपालिका के साथ हेराफेरी करने के कथित दावों की जांच करेंगे। इस व्यवस्था में फिक्सिंग की कोई भूमिका नहीं है। हम इसे अंतिम निष्कर्ष तक ले जाएंगे। पीठ ने इस घटनाक्रम को बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला बताया क्योंकि यह देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।

कोर्ट ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता का यह आग्रह ठुकरा दिया कि न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से इस मामले की जांच कराई जाए। पीठ ने कहा कि इस समय न्यायालय किसी भी प्रकार की जांच में नहीं पड़ रहा। हम सीबीआई और खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों से गुप्त मुलाकात कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते कि साक्ष्य सार्वजनिक हों।

जस्टिस मिश्रा का कहना था कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है और मुख्य न्यायाधीश ने कार्रवाई की है। भारत के इतिहास में पहली बार मुख्य न्यायाधीश ने यह कार्रवाई की है। ऐसा पहले से हो रहा था लेकिन किसी मुख्य न्यायाधीश ने ऐसा करने का साहस नहीं दिखाया। पीठ ने व्यापक साजिश का दावा करने वाले अधिवक्ता उत्सव सिंह बैंस को पूरी सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए। पीठ ने कहा, न्यायालय नहीं चाहता कि साक्ष्य नष्ट हों या उनके साथ कोई समझौता किया जा सके।

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