कश्मीर रवाना हुआ EU दल, अनुच्छेद 370 हटने के बाद का लेगा जायज़ा।

EU दल Article 370 हटाए जाने के बाद दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे गए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हालात का जायजा लेगा।

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यूरोपीय यूनियन (European Union (EU) MPs) सांसदों का एक दल मंगलवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे पर जा रहा है। यह दल मंगलवार सुबह होटल के निकलकर दिल्ली एयरपोर्ट के लिए निकल चुका है। यह दल Article 370 हटाए जाने के बाद दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे गए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हालात का जायजा लेगा।

भारत दौरे पर आए यूरोपीय यूनियन (European Union (EU) MPs) के 28 सांसदों को सरकार ने कश्मीर जाने की इजाजत दी है, लेकिन बता दें कि यह EU का कोई आधिकारिक दल नहीं है। इन सांसदों के दल ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से अलग-अलग मुलाकात की। पीएम मोदी ने EU सांसदों को अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि किन परिस्थितियों में यह फैसला लिया गया और किस तरह सीमा पार से चल रही आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए यह जरूरी कदम था।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे पर जाने वाले यूरोपीय यूनियन के सांसदों (European Union (EU) MPs) में छह पोलैंड और फ्रांस से 6-6, ब्रिटेन के पांच, इटली की चार, जर्मनी के दो और चेक गणराज्य, बेल्जियम, स्पेन व स्लोवाकिया के एक-एक सांसद हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद पहली बार किसी भी विदेशी दल को वहां जाने की इजाजत मिली है।

वेल्स से यूरोपीय संसद के सदस्य नाथन गिल ने एयरपोर्ट जाते हुए एएनआइ से बात करते हुए कहा, ‘यह हमारे लिए एक अच्छा अवसर है कि हम विदेशी दल के रूप में कश्मीर जाएं और वहां पर जो कुछ हो रहा है उसे अपनी आंखों से देखें।’

यूरोपीय यूनियन सांसदों (European Union (EU) MPs) के दल के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे को लेकर कांग्रेस को ऐतराज है। कांग्रेस ने इसे भारतीय संसद की संप्रभुता का अनादर बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ‘पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाएगी, क्योंकि सरकार का यह फैसला भारतीय सांसदों के सामूहिक विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।’ कांग्रेस के ही एक अन्य नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने Tweet किया कि जब भारतीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर के लोगों से मिलने से रोका जा रहा है तो फिर यूरोपीय नेताओं (EU) को ऐसी अनुमति क्यों दी जा रही है। यह भारत की अपनी संसद और लोकतंत्र का अपमान है।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी को भी यूरोपीय यूनियन सांसदों (European Union (EU) MPs) के दल को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जाने की अनुमति देने पर एतराज है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘भारतीय राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों को बार-बार श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर निकलने से क्यों रोका गया? मुझे भी श्रीनगर में तभी जाने दिया गया जब मेरी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मुझे अनुमति मिली। आज भी भारतीय सांसदों को जाने की अनुमति नहीं है, जबकि मोदी ईयू सांसदों का स्वागत कर रहे हैं।’

वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी यूरोपीय सांसदों (European Union (EU) MPs) को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे की इजाजत देने पर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं आश्चर्यचकित हूं कि विदेश मंत्रालय ने ईयू सांसदों के लिए उनकी निजी हैसियत में (अनऑफिशियल टूर) जम्मू-कश्मीर में कश्मीर क्षेत्र की यात्रा का प्रबंध किया है। यह हमारी राष्ट्रीय नीति के विपरीत है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह यह यात्रा रद करे क्योंकि यह अनैतिक है।’

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