पीएम मोदी के साथ बैठक में किस मुख्यमंत्री ने क्या कहा, Lockdown 4.0 के भी मिल रहे संकेत

बिहार, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र ने Lockdown बढ़ाए जाने का समर्थन किया, तो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और तेलंगाना ने 12 मई से ट्रेनें चलाने का विरोध किया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में सोमवार को ‘जन से जग’ का नारा देते हुए आर्थिक गतिविधियां शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से संक्रमण गांवों तक न पहुंचने देने की रणनीति बनाने का आग्रह भी किया।

उन्होंने  कहा कि जरूरत संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ने और चुनौतियों से निपटने का रास्ता तय करने की है। इस दौरान, पांच राज्यों ने Lockdown 17 मई के बाद भी बढ़ाने की मांग की है। जबकि गुजरात ने इसका विरोध किया। राजस्थान व केरल ने Lockdown में अधिक फैसले ले सकने के लिए राज्यों को और अधिकार देनेे की वकालत की।

चर्चा के दौरान बिहार, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र ने Lockdown बढ़ाए जाने का समर्थन किया, तो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और तेलंगाना ने 12 मई से ट्रेनें चलाने का विरोध किया। राजस्थान ने कहा-रेड, ग्रीन व ऑरेंज जोन तय करने का अधिकार राज्यों को मिले। जबकि, केरल ने लॉकडाउन से जुड़े दिशा-निर्देशों में उचित बदलाव करने की आजादी की मांग की।

Lockdown के तीसरे चरण के बाद की रणनीति तय करने के लिए दो दौर की यह बैठक करीब छह घंटे चली। पीएम मोदी (PM Modi) और मुख्यमंत्रियों की यह पांचवीं बैठक थी।

उन्होंने कहा, संक्रमण से निपटने की अब तक रणनीति को सफल रही है इसके कई सुखद परिणाम आए हैं।  राज्यों के सहयोग से देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्थिक सहित सभी मोर्चों पर अब रणनीति क्या हो, इस पर 15 मई तक राज्यों से कार्ययोजना मांगी, जिसके बाद ही केंद्र दिशा-निर्देश तय करेगा। 

Lockdown 17 मई के बाद भी जारी रह सकता है। हालांकि, चौथे चरण में और छूट मिल सकती है। पीएम मोदी के बैठक में दिए बयान से यह संकेत मिलते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि Lockdown के पहले चरण में जिन नियमों की दरकार थी, वो दूसरे चरण में जरूरी नहीं रह गईं। उसी तरह तीसरे चरण के नियमों की दरकार चौथे चरण के Lockdown में नहीं है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कंटेनमेंट जोन को छोड़कर दिल्ली सरकार सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां खोलने को तैयार है, इससे दिल्ली में अर्थव्यवस्था पटरी पर आएगी। 

प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने तेवर दिखाते हुए केंद्र पर राज्यों की सहमति के बिना निर्णय लेने का आरोप लगाया। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने केंद्र पर भेदभाव का भी आरोप लगाया और श्रमिकों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने पर सवाल खड़े किए। कहा, ट्रेनों से  श्रमिकों के गृह राज्य लौटने से संकट बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सोमवार को मुख्यमंत्रियों से कहा कि भारत ने कोरोना को जिस तरह हैंडल किया है, उसका लोहा दुनिया ने माना है। उन्होंने कहा, ये राज्यों के सहयोग से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा ‘जैसे हम सब एक साथ आगे बढ़ रहे थे वैसे ही बढ़ते रहेंगे’। आने वाले दिनों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इस दौरान कई मुख्यमंत्रियों ने ट्रेनों व उड़ानों पर रोक की मांग की। वहीं कुछ ने जांच मशीनों, आर्थिक मदद व नई रणनीति बनाने की मांग की।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि Lockdown पर केंद्र सरकार के हर फैसले का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया, अब तक 9 लाख से ज्यादा कामगारों और श्रमिकों को होम क्वारंटीन में भेजा जा चुका हैं। हम उन्हें नौकरी व रोजगार देने की तैयारी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रदेश में 2.99 लाख निगरानी पर हैं और 56 हजार से ज्यादा घरों का सर्वे किया गया है। 26 सरकारी लैब में जांच हो रही है। 660 निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत के रेट पर इमरजेंसी सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। 

सीएम योगी (CM Yogi) ने कहा कि पिछले चार दिनों में तीन लाख से ज्यादा लोग बसों व ट्रेनों के माध्यम से आए हैं। निकट भविष्य में 10 लाख से ज्यादा और आने हैं। 20 लाख को रोजगार देने की तैयारी के लिए हम लेबर रिफॉर्म लेकर आए हैं। लेबर रिफॉर्म उन्हीं जगह लागू किए जाएंगे, जहां नई यूनिट लगेंगी।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र Lockdown को लेकर ठोस और गंभीर निर्देश दे जिसका पालन सभी राज्य करें। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि मुंबई में लोकल ट्रेनों के संचालन को मंजूरी दी जाए ताकि जरूरी सेवा से जुड़े लोग आसानी से आ जा सकें।

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि Lockdown बढ़ाने का फैसला सही है लेकिन राज्यों को आर्थिक मदद दी जाए। रेड, ऑरेंज, येलो और ग्रीन जोन को जारी रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कहा कि मामले बढ़ने के मद्देनजर 31 मई तक ट्रेन-विमान शुरू न किए जांए। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में और लोग आएंगे तो स्थिति बिगड़ सकती है।

मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा मौजूदा हालात के हिसाब से रणनीति बनानी होगी  ताकि वायरस के बीच जीने को तैयार हो सके। मरीज या उसके परिवारों को हीन भावना से देखा जा रहा है, जिसे खत्म करना होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने COVID-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में आगे की राह पर चर्चा करने के लिए आज देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया।

प्रधानमंत्री ने अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा, ‘अब हमारे पास इस बारे में स्पष्ट संकेत हैं कि भारत में महामारी किन-किन भौगोलिक क्षेत्रों में फैली हुई है और सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कौन-कौन से हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ हफ्तों में अधिकारियों ने इस तरह की परिस्थितियों में जिला स्तर तक की परिचालन प्रक्रियाओं को अच्छी तरह से समझ लिया है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि COVID-19 के फैलाव के बारे में यह गहरी समझ इसके खिलाफ लड़ाई सही ढंग से लड़ने में देश की मदद करेगी।

उन्होंने कहा, ‘अत: अब हम कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अपनी उस रणनीति पर फोकस कर सकते हैं, जैसी कि होना चाहिए। हमारे पास दोहरी चुनौती है – बीमारी के संक्रमण की दर को कम करना  एवं सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सार्वजनिक गतिविधियों को धीरे-धीरे बढ़ाना और हमें इन दोनों ही उद्देश्यों की पूर्ति करने की दिशा में काम करना होगा।’

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में COVID-19 के फैलाव को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था पर एक रोडमैप तैयार करने के लिए राज्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार किया गया है।

मुख्यमंत्रियों ने COVID-19 के खिलाफ देश की लड़ाई में प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना की और देश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। कई मुख्यमंत्रियों ने कहा कि प्रवासियों की वापसी को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नए संक्रमण के जरिए महामारी के फैलने पर अंकुश लगाने के लिए सामाजिक दूरी के दिशा-निर्देशों, मास्क के उपयोग और स्वच्छता पर सख्ती से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

विदेश से वापस लौटने वाले फंसे भारतीयों को अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन करने पर भी प्रकाश डाला गया। अर्थव्यवस्था पर अपने सुझावों में मुख्यमंत्रियों ने MSME एवं बिजली जैसी अवसंरचना परियोजनाओं को आवश्यक सहायता देने,, ऋणों पर ब्याज दरों में राहत देने और कृषि उपज की बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने COVID-19 के खिलाफ देश की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने और जमीनी स्तर के अनुभवों से उत्पन्न मूल्यवान सुझाव देने के लिए मुख्यमंत्रियों का धन्यवाद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि COVID-19 के बाद विश्व मौलिक रूप से बदल गया है। अब विश्व युद्धों की तरह ही कोरोना-पूर्व विश्व एवं कोरोना-बाद विश्व होगा। इससे हमारे कामकाज के ढंग में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति से लेकर पूरी मानवता तक जीवन का नया तरीका ‘जन से लेकर जग तक’ के सिद्धांत पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी को नई वास्तविकता की योजना बनानी चाहिए।  

उन्होंने कहा, ‘भले ही हम Lockdown को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं, लेकिन हमें यह लगातार याद रखना चाहिए कि जब तक हम कोई वैक्सीन या समाधान नहीं ढूंढ लेते हैं, तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी बनाए रखना ही है।’

प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर फिर से जोर दिया और कहा कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों से Lockdown के बारे में विशिष्ट जानकारियां देने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा, ‘मैं आप सभी से 15 मई तक मेरे साथ इस व्यापक रणनीति को साझा करने का अनुरोध करता हूं कि आप किस तरह से अपने-अपने राज्यों में Lockdown की व्यवस्था से निपटना चाहते हैं। मैं चाहता हूं कि राज्य ब्लू प्रिंट तैयार कर यह बताएं कि वे Lockdown के दौरान और उसे क्रमबद्ध ढंग से हटाने के बाद विभिन्न बारीकियों से कैसे निपटेंगे।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारे सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए हमें एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। देश में मानसून के दस्तक देने पर कई गैर-कोविड 19 बीमारियां फैलेंगी जिनसे निपटने के लिए हमें अपनी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रणालियों को निश्चित तौर पर तैयार और मजबूत करना होगा।’

उन्होंने नीति निर्माताओं को यह भी ध्यान में रखने को कहा कि शिक्षा क्षेत्र में शिक्षण और सीखने (अध्ययन) के नए मॉडलों को कैसे अपनाया जाए। पर्यटन की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें घरेलू पर्यटन में काफी संभावनाएं नजर आती हैं, लेकिन हमें इसकी रूपरेखा के बारे में सोचने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘मेरा यह स्पष्ट मानना है कि Lockdown के पहले चरण में आवश्यक माने जाने वाले उपाय दूसरे चरण के दौरान जरूरी नहीं थे और इसी तरह तीसरे चरण में आवश्यक माने जाने उपाय चौथे चरण में जरूरी नहीं हैं।’ 

ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए यह आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी मार्गों पर फिर से ट्रेन सेवाओं को शुरू नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल सीमित संख्या में ही ट्रेनें चलेंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अब भी आशावान हैं। इसी तरह एक भी राज्य ने निराशा नहीं दिखाई है और यह सामूहिक संकल्प भारत को COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में जीत दिलाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ‘कोविड काल के बाद’ मिलने वाले अवसरों से अवश्य ही लाभ उठाना चाहिए।

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