तीन दौर की वार्ता विफ़ल, करनाल में किसानों ने घेरा सचिवालय

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि सरकार से बातचीत विफल रही है और किसान अपनी मांगें मनवाये बिना नहीं लौटेंगे।

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महापंचायत (Mahapanchayat) के लिए मंगलवार को करनाल (Karnal) में जुटे हजारों किसान रात को यहां जिला सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गये। पुलिस ने वाटर कैनन का जमकर प्रयोग किया, लेकिन किसानों को खदेड़ नहीं पायी। देर रात तक किसान जिला सचिवालय के सामने डटे हुए थे। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि सरकार से बातचीत विफल रही है और किसान अपनी मांगें मनवाये बिना नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा कि हम बैठ गये हैं, टैंट की व्यवस्था हो रही है, अब सरकार चाहे 2 दिन में वार्ता करे या 2 महीने में। उन्होंने कहा कि हमने एक मोर्चा दिल्ली में लगा रखा है, एक करनाल में भी लगा देंगे।

इससे पहले दिन में जिला प्रशासन और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के बीच 3 दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किसान संगठन 28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज को लेकर करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा (SDM, Ayush Sinha) पर कार्रवाई और कुछ अन्य मांगें कर रहे हैं। किसान नेताओं का 11 सदस्यीय दल राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) और बलबीर सिंह राजेवाल की अगुवाई में प्रशासन से वार्ता के लिए जिला सचिवालय पहुंचा। BKU के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी और योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) भी दल में शामिल थे। करीब ढाई घंटे चली वार्ता के बाद योगेंद्र यादव ने कहा, ‘सरकार लाठीचार्ज के लिए दोषी अधिकारी पर कार्रवाई को तैयार नहीं है। हमने कहा कि दोषी अधिकारी पर पर्चा दर्ज होना चाहिये, लेकिन सरकार नहीं मानी। हमने कहा कि अधिकारी को सस्पेंड तो करो, सरकार उसके लिए भी तैयार नहीं हुई।’

प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने अनाज मंडी में महापंचायत स्थल पर आकर किसानों को बैठक की जानकारी दी और जिला सचिवालय की तरफ कूच का ऐलान कर दिया। मंडी में पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया और हजारों किसान सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जीटी रोड (GT Road) पर आ गये। प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या करीब 20 हजार थी और उन्हें जीटी रोड से दूर रखने के प्रशासन के इंतजाम धरे रह गये।

हजारों किसानों के साथ जिला सचिवालय का घेराव करने जा रहे किसान नेता राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव और गुरनाम सिंह चढूनी समेत कई नेताओं को पुलिस ने जीटी रोड पर हिरासत में लिया, लेकिन जल्द ही उन्हें छोड़ना पड़ा। गुस्साये किसानों ने गिरफ्तारी के लिए लाई गयी बसों को घेर लिया और उनके टायराें की हवा निकाल दी। नमस्ते चौक पर हुई तकरार के बाद डीसी निशांत कुमार यादव (DC, Nishant Kumar Yadav) और एसपी गंगाा राम पुनिया (SP, Ganga Ram Punia) वहां पहुंचे और उन्होंने किसान नेताओं से बात की। इसके बाद महिलाओं समेत बड़ी संख्या में किसानों ने गिरफ्तारी दी। इसके बावजूद हजारों की संख्या में किसान फ्लाईओवर के रास्ते जिला सचिवालय की तरफ बढ़ गये। शाम पौने 7 बजे जिला सचिवालय के निकट पहुंचे किसानों ने पहले पुलिस द्वारा लगाये गये डंपर पार किये और फिर बैरिकेड तोड़ डाले। वहीं, देर रात जीटी रोड पर यातायात सामान्य हो गया।

चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा, लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। इंटरनेट सेवाएं बंद करने के बारे में सीएम ने कहा, स्थानीय स्तर पर प्रशासन कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे फैसले लेता है। यह निर्णय प्रशासन का है कि उसे क्या कदम उठाने हैं।

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि बातचीत हमेशा प्रजातंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। किसानों से दो दौर की बातचीत हो चुकी है। उन्होंने साथ ही कहा, पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। पर्याप्त संख्या में व्यवस्था है और 40 कंपनियां करनाल में तैनात हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) नवदीप सिंह विर्क को स्वयं उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारें 10 महीने से गांधीवादी तरीके से आंदोलनरत किसानों को जानबूझकर भड़काने और लड़वाने की साजिश कर रही हैं। जवानों और किसानों को लड़वाने की भी साजिश है। करनाल में हजारों किसानों पर पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन किसानों ने संयम नहीं खोया।’ सुरजेवाला ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया, ‘मोदी जी, आप दोहा (कतर) में तालिबान से बात कर सकते हैं, तो फिर दिल्ली की सीमा पर 10 महीने से बैठे अन्नदाताओं से बात क्यों नहीं कर सकते? नरेंद्र मोदी जी, सब कार्य बंद करके देश के किसानों को बातचीत के लिए बुलाएं।’

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