एक शर्त पर चीन से मिलने को तैयार है तिब्बत

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तिब्बतियों के आध्या‍त्मिक प्रमुख दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत का चीन के साथ उसी तरह से अस्तित्व रह सकता है, जिस तरह से यूरोपीय संघ के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. उन्होंने फिर कहा कि वह अपने देश के लिए सिर्फ स्वायत्तता चाहते हैं, स्वतंत्रता नहीं.

समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार, दलाई लामा ने इंटरनेशनल कैम्पेन फॉर तिब्बत की 30वीं वर्षगांठ पर अपने वीडियो संदेश में कहा, ‘मैं हमेशा यूरोपीय संघ की भावना की सराहना करता हूं. किसी एक के राष्ट्रीय हित से साझा हित ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. इस तरह की कोई अवधारणा सामने आई तो मैं उसके भीतर रहना पसंद करूंगा.’

गौरतलब है कि दलाई लामा को चीन एक ‘खतरनाक अलगाववादी’ मानता है. वह 1959 से ही निर्वासन में भारत में रह रहे हैं. साल 1959 में तिब्बत में एक जनक्रांति के विफल हो जाने के बाद दलाई लामा को अपना देश छोड़ना पड़ा था. इसके करीब नौ साल पहले ही चीन की सेना ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था. दलाई लामा ने भारत के धर्मशाला में अपना केंद्र बनाया और एक निर्वासित सरकार की स्थापना की.

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