पीएम मोदी को डिवाइडर-इन-चीफ बताने वाली Time Magazine ने लिया यू टर्न, कहा ‘पीएम मोदी जैसा कोई नहीं।’

Time Magazine ने प्रधानमंत्री की तारीफों का पुल बढ़ाते हुए लिखा "मोदी ने भारत को जिस तरह से एकजुट किया है वैसा दशकों में कोई प्रधानमंत्री नहीं कर पाया" है।

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लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले प्रचार अंतिम चरणों के दौरान विश्व विख्यात टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) पर एक कवर स्टोरी की थी। जिसमें उन्हें डिवाइडर-इन-चीफ (देश को तोड़ने वाला मुखिया) की उपमा दी गई थी। ब्रिटिश मूल के पाकिस्तानी पत्रकार आतिश तासीर (Aatish Taseer) ने उक्त रिपोर्ट लिखी थी।

लेकिन अब एक महीने से भी पहले उसी टाइम मैगजीन (Time Magazine) के सुर पूरी तरह से बदल गए हैं। भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत और नरेंद्र मोदी की स्वीकार्यता के बाद पत्रिका ने प्रधानमंत्री की तारीफों के पुल बांधने वाला एक लेख अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया है। इस नए लेख का शीर्षक “मोदी ने भारत को जिस तरह से एकजुट किया है वैसा दशकों में कोई प्रधानमंत्री नहीं कर पाया” है।

मनोज लाडवा के इस लेख में बताया गया है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय इतिहास में सबसे ज्यादा अपमानजनक, चोट पहुंचाने वाले और निम्न भाषायी स्तर का प्रदर्शन हुआ। जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने समाज के हर तबके की बात करने की कोशिश की। मोदी के पहले कार्यकाल और चुनाव के दौरान उनकी नीतियों की कड़ी और अक्सर अनुचित आलोचना के बावजूद कोई भी प्रधानमंत्री पिछले पांच दशकों के दौरान उनकी तरह भारत को एकजुट नहीं कर पाया।

आखिरी बार कोई प्रधानमंत्री पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में 1971 में लौटा था। उनके गठबंधन को राष्ट्रीय वोट का केवल 50 फीसदी मिला था। यह कैसे माना जाता है कि विभाजनकारी आंकड़ा न केवल सत्ता बनाए रखने बल्कि समर्थन के स्तर को बढ़ाने में कामयाब रहा? इसका एक महत्वपूर्ण कारक यह है कि मोदी भारत की सबसे लाइन- वर्ग विभाजन को पार करने में कामयाब रहे। नरेंद्र मोदी का जन्म भारत के सबसे वंचित सामाजिक समूहों में से एक में हुआ था।

वह इतने ऊपर तक पहुंचे हैं जिसकी वजह है वह आकांक्षात्मक श्रमिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपने देश के सबसे गरीब नागरिकों के साथ खुद को जोड़ सकते हैं जैसा कि 72 सालों तक भारत का नेतृत्व करने वाले नेहरू-गांधी के राजनीतिक वंश नहीं कर पाए। उनकी लगातार दूसरी जीत जन स्वीकार्यता की जीत है और देश के अत्यधिक गरीबों के लिए कल्याणकारी नीतियों का अवसर भी है।

इससे पहले टाइम ने अपने अंतरराष्ट्रीय संस्करण के कवर पेज पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ विवादास्पद हेडलाइन प्रकाशित की थी। जिसमें प्रधानमंत्री को भारत का ‘डिवाइडर इन चीफ’ (फूट डालने वालों का मुखिया) बताया था। नरेंद्र मोदी पर केंद्रित इस कवर स्टोरी को पत्रकार आतिश तासीर ने लिखा था। इससे पहले टाइम पत्रिका ने साल 2012 फिर साल 2015 में मोदी को अपने कवर पेज पर जगह दी थी। वहीं साल 2014, 2015 और 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था। मई 2015 में पत्रिका ने मोदी पर कवर स्टोरी की थी और उसे नाम दिया था- ‘व्हाय मोदी मैटर्स’ (‘Why Modi Matters’)।

प्रकाशित आलेख में कहा गया था कि मोदी ने भारत के महान शख्सियतों पर राजनीतिक हमले किए जैसे कि नेहरू। वह कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं, उन्होंने कभी भी हिंदू-मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। इस लेख में आगे लिखा था कि नरेंद्र मोदी का सत्ता में आना इस बात को दिखाता है कि भारत में जिस कथित उदार संस्कृति की चर्चा की जाती थी वहां पर दरअसल धार्मिक राष्ट्रवाद, मुसलमानों के खिलाफ भावनाएं और जातिगत कट्टरता पनप रही थी।

सामाजिक रूप से प्रगतिशील नीतियों के माध्यम से उन्होंने बहुत से भारतीयों, हिंदू और धार्मिक अल्पसंख्यकों को पुरानी पीढ़ी की मुकाबले काफी तेजी से गरीबी से बाहर निकाला। मोदी ने देश में स्वच्छता लाने का संकल्प लिया था और उन्होंने ऐसा किया भी। पहले केवल 40 प्रतिशत घरों तक शौचालयों की सुविधा मौजूद थी। अब यह संख्या 95 प्रतिशत है। अब लगभग भारत के हर गांव की पहुंच बिजली तक हो चुकी है। जबकि उनके कार्यकाल संभालने से पहले यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था।

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