TRIBHANGA: मां और बेटी के रिश्ते पर बनी खूबसूरत कहानी है त्रिभंगा

यह फिल्म अस्पताल के बिस्तर पर लेटी नयनतारा आप्टे (तन्वी आजमी), एक्ट्रेस और ओडिशी डांसर अनुराधा आप्टे (काजोल) और माशा मेहता (मिथिला पालकर) के रिश्तों की कहानी है।

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फिल्म: त्रिभंगा (Tribhanga)
डायरेक्टर: रेणुका शहाणे
स्टारकास्ट: काजोल, मिथिला पालकर, तन्वी आजमी, कुणाल रॉय कपूर
बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल की फिल्म त्रिभंगा ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म में काजोल के अलावा मिथिला पालकर, तन्वी आजमी, कुणाल रॉय कपूर जैसे सितारों ने काम किया है। फिल्म में तीन पीढ़ियों के मां-बेटी के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते के जरिए खूबसूरती से पिरोया गया है।

यह फिल्म अस्पताल के बिस्तर पर लेटी नयनतारा आप्टे (तन्वी आजमी), एक्ट्रेस और ओडिशी डांसर अनुराधा आप्टे (काजोल) और माशा मेहता (मिथिला पालकर) के रिश्तों की कहानी है। नयन और अनु अपनी शर्तों पर जिंदगी जीते हैं। उन्होंने कई बार समान की मान्यताओं और रूढ़ियों के खिलाफ जाकर काम किया है। दोनों ने समाज में अपनी प्रतिभा और जिद से जगह बनाई है। अनुराधा एक रूसी युवक के साथ लिव-इन में रह कर प्रेग्नेंट हो जाती है। वह बच्ची को जन्म देती है, लेकिन कभी शादी नहीं करती। अनुराधा और नयनतारा का जीवन कभी स्थिर नहीं रहा। दोनों के जीवन में पुरुष आते-जाते रहे, लेकिन माशा ऐसी नहीं है। नानी और मां की टूटी-बिखरी जिंदगी को देखने के बाद माशा अपने और अपने बच्चे के लिए एक स्थिर जिंदगी चाहती हैं। फिल्म के आखिर में तीनों की जिंदगी किस मोड़ पर आकर ठीक होती है, यह जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी।

काजोल ने अपनी एक्टिंग से फिल्म में जान फूंक दी है। मां और एक बेटी के रोल में उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। ऐसा लगता है कि इस फिल्म से दर्शकों का दिल जीतने का भार उनके कंधों पर ही था और उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। इसके अलावा मिथिला पालकर ने अपने काम के साथ न्याय किया है। कुणाल राय कपूर राइटर के रोल में अच्छे लगे।

इस फिल्म से रेणुका शहाणे ने बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया है। उन्होंने ही इस फिल्म को लिखा है। पहली फिल्म से ही उन्होंने अपने डायरेक्टर वाले हुनर को साबित कर दिखाया है। फिल्म अपने विषय से कभी भटकती नहीं है। जितनी खूबसूरती से इस फिल्म को लिखा गया है उनकी ही बारीकी से रेणुका ने इसके निर्देशन पर काम किया है। फिल्म में घटनाओं के साथ भावनाओं को बराबर जगह दी गई है।

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