हंगामे के बीच पेश हुआ तीन तलाक बिल, कांग्रेस ने बिल का किया विरोध

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यदि किसी गैर मुस्लिम पर इस मामले में केस होता है तो उसे एक साल की सजा होती है लेकिन मुसलमान को तीन साल की सजा का प्रावधान... क्या यह आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन नहीं है।

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विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार को तीन तलाक बिल लोकसभा में के पटल पर रखा गया। इस पर विपक्षी सांसदों ने दावा किया कि ऐसा किया जाना संविधान का उल्‍लंघन है। इसके बाद कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने इसके लाए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। इसके बाद लोकसभा अध्‍यक्ष ने वोटिंग कराई जिसके बाद यह बिल 74 के मुकाबले 186 मतों के समर्थन से पेश हुआ। 

दूसरी बार चुनाव जीत कर प्रचंड बहुमत के साथ सत्‍ता में आई मोदी सरकार का 17वीं लोकसभा में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 2019’ पहला विधेयक है। शुरुआत में इस विधेयक के पक्ष में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लैगिक समानता और न्‍याय के लिए इस कानून का लाया जाना बेहद जरूरी है। पिछले साल दिसंबर में लोकसभा से यह बिल पारित हुआ था लेकिन राज्यसभा में पेंडिंग था। चूंकि राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया तो नई लोकसभा में संविधान की प्रक्रिया के तहत नए सिरे से नया बिल को लाया गया है। 

इस विधेयक की जरूरत बताते हुए कानून मंत्री ने देश में दर्ज किए गए तीन तलाक के 543 मामलों का हवाला दिया। उन्‍होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा तीन तलाक पर रोक लगाए जाने के बावजूद देश में इस तरह के 200 मामले दर्ज किए गए हैं। बिल को पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। एआईएमआईएम (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि तीन तलाक पर लाया गया यह बिल मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है।

विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सदन में कहा कि मैं तीन तलाक का समर्थन नहीं करता, लेकिन इस बिल के विरोध में हूं। यह बिल संविधान के खिलाफ है, इसमें सिविल और क्रिमिनल कानून को मिला दिया गया है। इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी गैर मुस्लिम पर इस मामले में केस होता है तो उसे एक साल की सजा होती है लेकिन मुसलमान को तीन साल की सजा का प्रावधान… क्या यह आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन नहीं है।

ओवैसी ने कहा कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि यदि कोई तीन तलाक देता है तो भी शादी नहीं टूटेगी। ऐसे में बिल में जो प्रवाधान है, उससे महिला का पति जेल चला जाएगा। यही नहीं उसे कानूनन तीन साल जेल में रहना होगा। फि‍र मुस्लिम महिला को गुजारा-भत्ता कौन देगा। क्‍या सरकार मुस्लिम महिला को गुजारा भत्‍ता देगी। महोदय, इस बिल से केवल मुस्लिम पुरुषों को सजा मिलेगी। सरकार मुस्लिम महिलाओं के हित में नहीं है बल्कि आप उन पर बोझ डाल रही है। कांग्रेस नेता शशि थरूर और असदुद्दीन ओवैसी के साथ साथ आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने भी इस बिल का विरोध किया।    

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