डर के आगे जीत है, कैसे पाए अपने डर पर काबू

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डर सभी को लगता है, लेकिन जब कोई व्यक्ति हमेशा ऐसी मनोदशा में रहने लगे तो उसे सचेत हो जाना चाहिए, भले ही इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन ईमानदारी के साथ आत्म-मूल्यांकन (Self assessment) करते हुए इसे मैनेज करने की कोशिश तो करनी ही चाहिए, कुछ फीयर मैनेजमेंट टिप्स, जो आपके लिए बहुत मददगार साबित होंगे और शुरुआत में छोटी-छोटी बातों से जुड़े निर्णय खुद लेने की कोशिश करें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और बड़े फैसले लेने में आपको डर नहीं लगेगा।

क्या है वजह

पारिवारिक पृष्ठभूमि (Background) और परवरिश के तौर-तरीके का असर इंसान के व्यक्तित्व पर ताउम्र बना रहता है, मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि जिन बच्चों की परवरिश सख्त अनुशासन या संरक्षण भरे माहौल में होती है, बड़े होने के बाद उनका मनोबल कमज़ोर पड़ जाता है, अगर छोटी-छोटी गलतियों पर कड़ी सज़ा दी जाए तो ऐसे बच्चे पेरेंट्स की अनुमति के बगैर निर्णय लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाते और यही आदत उन्हें हमेशा के लिए डरपोक बना देती है, कुछ लोग अति संवेदनशील होते हैं और मामूली विफलताओं का भी उन पर इतना गहरा असर पड़ता है कि वे दोबारा प्रयास करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

नकारात्मक प्रभाव

किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले नाकामी के बारे में सोचकर डरने की आदत व्यक्ति को हर कदम पर आगे बढऩे से रोकती है, इससे उसकी सोचने-समझने की क्षमता और तर्क-शक्ति भी कमज़ोर पड़ जाती है, ऐसे में वह सही-गलत की पहचान नहीं कर पाते, अगर किसी अच्छे कार्य के मार्ग में ज़रा भी जोखिम हो तो ऐसे लोग अपने कदम वापस खींच लेते हैं और हमेशा किसी आसान रास्ते की तलाश में रहते हैं, प्रोफेशनल लाइफ में भी ऐसे लोग नई चुनौतियां स्वीकारने से डरते हैं, इसलिए अकसर कामयाबी से वंचित रह जाते हैं, डरने वाले लोग दूसरों को हमेशा संदेह की दृष्टि से देखते हैं, इसलिए नए दोस्त नहीं बना पाते, पारिवारिक जीवन में भी ऐसे व्यक्ति का हर निर्णय डर की भावना से प्रभावित होता है, उससे गलतियां होने की आशंका अधिक होती है, इसलिए ऐसी नकारात्मक मनोदशा से बाहर निकलने का प्रयास बहुत ज़रूरी है।

डर पर काबू पाए

1- शुरुआत में छोटी-छोटी बातों से जुड़े निर्णय खुद लेने की कोशिश करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और बड़े फैसले लेने में आपको
डर नहीं लगेगा।
2- अगर कोई आपके निर्णय पर अपनी असहमति ज़ाहिर करता है तो तार्किक ढंग से उसे अपनी बात समझाने की कोशिश करें।
3- इंसान गलतियों से ही सीखता है। अगर आपका कोई फैसला गलत साबित होता है तो उसके बारे में सोचकर उदास न हों।
4- लोग क्या कहेंगे, यह डर अपने मन से निकाल दें क्योंकि ऐसी सोच व्यक्ति के विकास में सबसे बड़ी बाधक है।
5- अगर आपको किसी व्यक्ति की सलाह नापसंद हो तो उसके सामने विनम्रतापूर्वक असहमति ज़ाहिर करने की कला भी सीखें।
6- इंटरनेट पर मोटिवेशनल स्पीकर्स की स्पीच सुनें, अच्छी किताबें पढ़ें और सकारात्मक सोच वाले लोगों से दोस्ती बढ़ाएं।

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