सोशल मीडिया पर पर ट्रोल हुईं सुषमा स्वराज को भाजपा से सिर्फ राजनाथ का साथ

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गृह मंत्री राजनाथ सिंह मोदी सरकार में अकेले ऐसे मंत्री हैं, जो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के ट्रोल होने पर उनके पक्ष में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने उन कथित बीजेपी समर्थकों की सुषमा की ट्रोलिंग को ‘एकदम गलत’ करार दिया, जिनमें से ज्यादातर को केंद्रीय मंत्री फॉलो करते हैं। दो अलग मजहब वाले एक दंपती को पासपोर्ट दिलाने में मदद करने पर कथित बीजेपी समर्थकों ने सुषमा पर मुसलमानों का तुष्टीकरण करने का आरोप लगाया था।

सुषमा की ट्रोलिंग के बारे में संवाददाताओं के पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं इसे एकदम गलत मानता हूं।’ सूत्रों ने बताया कि राजनाथ सुषमा से एकजुटता दिखाने के लिए उनसे बात भी की थी। लखनऊ के रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से तन्वी को पासपोर्ट दिलाने में मदद करने के लिए सुषमा को ट्रोल किया गया था। पासपोर्ट ऑफिस में महिला के साथ कथित रूप से बदतमीजी करनेवाले एंप्लॉयी विकास मिश्रा का तबादला कर दिया गया था। हालांकि, लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की जांच में पाया गया कि तन्वी सेठ और उसके पति ने पासपोर्ट बनवाने के लिए झूठी जानकारी दी थी। इसी के बाद कई लोग उन दोनों पर कड़ी कार्रवाई की मांग जोरशोर से करने लगे।

जब यह घटना हुई थी, तब सुषमा विदेश में थीं। उन्हें दक्षिणपंथियों ने खूब भला बुरा कहा था। एक व्यक्ति ने उनके पति स्वराज कौशल से कहा कि सुषमा के लौटने पर उन्हें उनकी खूब पिटाई करनी चाहिए। इस पर कौशल ने सुषमा के लिए ट्वीट किया और बताया कि कैसे उन्होंने उनकी कैंसर पीड़ित मां की देखभाल की थी। उन्होंने ट्रोल के जवाब में लिखा कि सुषमा के लिए प्रयोग किए गए शब्दों से उन्हें ‘असहनीय पीड़ा’ हुई है।

दूसरे राजनीतिक दलों ने सुषमा की ट्रोलिंग होने की कड़ी निंदा की और उनका पुरजोर सपॉर्ट किया, लेकिन बीजेपी ने पूरे मामले में एकदम चुप्पी साधे रखी। इस बारे में प्रतिक्रिया मांगे जाने पर एक बीजेपी लीडर ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि राजनाथ सिंह जैसे सीनियर लीडर इसके खिलाफ बोल चुके हैं तो फिर बाकी के लिए कुछ भी कहने की जरूरत नहीं रह गई है जबकि आमतौर पर राजनीतिक घटनाओं पर बीजेपी नेताओं के खूब प्रतिक्रियाएं आती हैं।

बीजेपी के दूसरे लीडर्स ने कहा था कि ट्रोलिंग बड़ी समस्या बन गई है और अपने पेशे के चलते उन्हें बहुत कुछ सुनना पड़ जाता है। ट्रोल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी नहीं छोड़ा। हालांकि सुषमा का मामला दूसरों से अलग है क्योंकि उनकी ट्रोलिंग उन लोगों ने की थी जो सोशल मीडिया पर हमेशा बीजेपी का खुलकर सपॉर्ट करते हैं। सुषमा से सहानुभूति रखनेवाले बीजेपी लीडर ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, ‘क्या आपको लगता है कि पार्टी चुप रहती, अगर शाह या मोदी की ट्रोलिंग उसी तरह होती जिस तरह सुषमाजी की हुई है?’

कुछ लीडर्स का मानना था कि इस मामले में ज्यादा प्रतिक्रिया होने से यह मुद्दा बना रहता जो पार्टी के लिए सही नहीं होता। सुषमा ने यह जानने के लिए ऑनलाइन पोल कराया था कि क्या उनके खिलाफ हुए ट्वीट का पब्लिक सपॉर्ट करती है? यह देखना दुखद रहा कि जवाब में 43% लोगों ने उनके खिलाफ हुए भद्दे कॉमेंट्स और ट्वीट को सही बताया था।

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