फिर से Lockdown की आशंका के सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (SENSEX) 32 अंकों की गिरावट के साथ 34,214.69 के स्तर पर खुला।

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भारत में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के तेजी से बढ़ते मामले को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि देश में फिर से Lockdown लग सकता है। ऐसी आशंका जापान की फाइनेंशियल रिसर्च फर्म नोमुरा ने जाहिर की है। इन खबरों के बीच शेयर बाजार आज भारी गिरावट के साथ खुले। गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (SENSEX) 32 अंकों की गिरावट के साथ 34,214.69 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (NIFTY) ने भी कारोबार की शुरुआत 10,094.10 के स्तर से की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (SENSEX) 171.28 अंक टूट गया है। वहीं निफ्टी (NIFTY) भी 10100 के नीचे कारोबार कर रहा है।

भारत अब Unlock की ओर बढ़ चुका है। देश में चरणबद्ध तरीके से Lockdown में दी गई ढील भारत के लिए फिर से मुसीबत बन सकती है। जापान की फाइनेंशियल रिसर्च फर्म नोमुरा ने भारत को उन 15 देशों की लिस्ट में शामिल कर दिया है, जहां Lockdown में ढील देने के बाद कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आशंका जताई जा रही है कि संक्रमित मामलों की संख्या में कमी नहीं आने पर भारत फिर से Lockdown घोषित कर सकता है।

नोमुरा ने अपनी इस रिसर्च में दुनिया के 45 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों को शामिल किया है। भारत को डेंजर जोन में रखा गया है, जहां कोरोना वायरस की दूसरी लहर आने की प्रबल संभावना है। इस लिस्ट में भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब, कोलंबिया, ब्राजील, सिंगापुर, स्वीडन, इंडोनेशिया, मैक्सिको, कनाडा, अर्जेंटीना, पेरू, दक्षिण अफ्रीका, चिली और इक्वाडोर ।

उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में तीस शेयरों वाला SENSEX 290.36 अंक मजबूत होकर 34,247.05 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का NIFTY 69.50 अंक की बढ़त के साथ 10,116.15 अंक पर बंद हुआ। SENSEX के शेयरों में इंडसइंड बैंक सर्वाधिक लाभ में रहा और इसमें 7.93 प्रतिशत की तेजी आई इसके अलावा कोटक बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC, एक्सिस बैंक और एसबीआई में तेजी रही। वहीं दूसरी तरफ हीरो मोटो कार्प, टाटा स्टील, बजाज ऑटो और ONGC में 3.92 प्रतिशत तक की गिरावट आई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति आने से पहले बाजारों में मिला-जुला रुख रहा।

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