Coronavirus- WHO ने कहा, कोरोना को हराने में केवल Lockdown पर्याप्त नहीं …

चीन के दबाव में WHO ने मध्य जनवरी में इस बीमारी के खतरे को कम बताया लेकिन खुद चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 20 जनवरी को इसकी भयावहता बता दी।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानना है कि कोरोना (Coronavirus) को हराने के लिए शहरों और देशों को Lockdown करने से ही काम नहीं चलेगा। Lockdown के साथ जन स्वास्थ्य के पर्याप्त कदम उठाते रहने होंगे नहीं तो यह बीमारी फिर पनप सकती है। WHO के शीषर्ष इमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रायन ने BBC को दिये एक साक्षात्कार में कहा कि कोरोना से फैली बीमारी से निपटने के लिए देश सिर्फ Lockdown के भरोसे नहीं रह सकते हैं।

रायन ने कहा कि यह बीमारी दोबारा न पनपे इसके लिए जन स्वास्थ्य के सभी उपाय करने होंगे। हमें सबसे पहले कोरोना से बुरी तरह बीमार व संक्रमित हुए लोगों का पता करना है। इनके संपर्क में कौन-कौन आया उनका भी पता करना होगा। फिर इन सभी को आइसोलेट कर उनका ठीक से इलाज करना होगा। रायन ने कहा कि खतरा तो Lockdown से भी है। अगर अभी हम बीमार और संक्रमित लोगों का पता कर उनका इलाज शुरू नहीं करते तो Lockdown हटने की स्थिति में इस बीमारी से जूझ रहे लोगों की संख्या एकदम से बढ़ सकती है।

उल्लेखनीय है कोरोना (Coronavirus) के कारण ताइवान (Taiwan) समेत कई देश WHO की आलोचना कर रहे हैं। ताइवान का कहना है कि WHO समय से इस संकट की चेतावनी देने में नाकाम रहा। ताइवान का कहना है कि उसने वुहान से शुरू हुई इस संक्रामक बीमारी के बारे में डब्लूएचओ और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामक (IHR) को 31 दिसंबर को ही सावधान कर दिया है। मालूम हो कि चीन द्वारा अपना हिस्सा बताये जाने की जिद के कारण ताइवान को WHO ने संगठन से बाहर कर रखा है।

Taiwan के अधिकारियों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी WHO ने अन्य देशों को Covid-19 की भयावहता से आगाह नहीं किया। डब्लूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहैनम द्वारा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ करने की भी खूब आलोचना हो रही है। टेड्रोस ने कहा था कि बीमारी से निपटने में जिनपिंग ने बहुत अच्छा काम किया।

वहीं जानकारों का मानना है कि चीन की सरकार ने इस मामले को पहले रफादफा करने की कोशिश की लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर उसे संकट की गंभीरता को स्वीकार करना पड़ा। वायरस के नामकरण को लेकर भी WHO के प्रमुख की खूब आलोचना हो रही है। ताइवान के लोगों का आरोप है कि चीन के दबाव में WHO ने मध्य जनवरी में इस बीमारी के खतरे को कम बताया लेकिन खुद चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 20 जनवरी को इसकी भयावहता बता दी।

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