मध्य प्रदेश में क्यों कांग्रेस नहीं जीत पायी एक भी सीट।

लोकसभा चुनाव में BJP ने Congress का सूपड़ा साफ कर दिया है और राज्य की कुल 29 सीटों में से 28 पर बढ़त बना ली है.

0
322

Madhya Pradesh – कुछ समय पहले ही राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर के बाद कांग्रेस ने भाजपा को शिकस्त दी, अब 2019 लोकसभा चुनाव में BJP ने Congress का सूपड़ा साफ कर दिया है और राज्य की कुल 29 सीटों में से 28 पर बढ़त बना ली है. मध्यप्रदेश में Congress का एक भी सीट ना जीत पाने का क्या कारण रहा

कर्ज माफी (Farmer Loan): किसान आंदोलन की वजह से विधानसभा चुनाव (MP State Elections) में कांग्रेस को बहुत फायदा हुआ था और यह भी एक बड़ा कारण था जिससे राज्य में कांग्रेस (Congress) की सरकार आई.

सरकार बनाने के पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के दावेदार कमलनाथ (Kamal Nath) ने किसानों की कर्जमाफी (Loan Waver) का वादा किया था, जिससे पार्टी को बहुत फायदा हुआ और राज्य सरकार बनाने में कांग्रेस को सफलता मिली. लेकिन बाद में किसानों की कर्जमाफी डिफॉल्टर्स (Defaulters) तक की सीमित रह गई जिससे लोकसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान हुआ.

बंद की छात्रों की स्कॉलरशिप (Student Scholarship): किसान का कर्ज माफ करने के ऐबज में कमलनाथ ने छात्रों की स्कॉलरशिप बंद कर दी जिससे युवा मतदाताओं में भारी निराशा देखी गई. मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की सरकार में इन छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं और कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही कुछ कठोर निर्णय लिए थे.

बिजली की लचर व्यवस्था (Poor Electricity) : बिजली के मामले में बीजेपी सरकार (BJP) के समय में अच्‍छी स्थिति रही. गांवों और तहसील क्षेत्रों में भी पावरकट नहीं के बराबर था लेकिन कांग्रेस की सरकार आते ही पावर कट का दौर शुरू हो गया. बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सभाओं में कहा, लालटेन का फिर से इंतजाम कर लीजिए.

थोक में तबादले (Transfers): राज्‍य में सत्‍ता संभालते ही कांग्रेस के राज में थोक में तबादले शुरू हो गई. इसे लेकर कर्मचारी वर्ग में खासी नाराजगी रही. हालत यह रही कि कुछ कर्मचारियों के तो दो-तीन माह के अंतरात में दो या तीन बार तबादले हुए.

3000 करोड़ रुपए का ट्रेडिंग घोटाला (3000 Cr Scam): मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया जो लगभग 3,000 करोड़ रुपए का था, इस ट्रेडिंग घोटाले में आयकर विभाग (IT department) ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के रिश्तेदारों के घर पर छापा मारा था. यह भी बहुत बड़ी वजह रही कि प्रदेश की जनता ने 2019 लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से NDA के उम्मीदवारों को वोट दिया.

कांग्रेस में आपसी कलह (Internal fight): कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव में कमलनाथ और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने जमकर मेहनत की थी ज्‍योतिरादित्‍य को सीएम पद का दावेदार भी माना जा रहा था लेकिन आखिर में फैसला कमलनाथ के पक्ष में हुआ.

लोकसभा चुनाव के दौरान सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को पश्चिमी यूपी का प्रभार दे दिया गया, इस कारण वे मध्‍यप्रदेश के चुनावों में ज्‍यादा वक्‍त नहीं दे पाए. एक और दिग्‍गज नेता दिग्विजय सिंह को भोपाल से उम्‍मीदवार बनाकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला था. अंदरखाने इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव एकजुट होकर नहीं लड़ा. दिग्विजय को भोपाल सीट पर अकेला ही छोड़ दिया गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here