शशि थरूर – मोदी सरकार के 7 मंत्री चुनाव नहीं लड़ रहे, लड़ कौन रहा है? निरहुआ यादव, सनी देओल, प्रज्ञा ठाकुर!

मोदी सरकार के विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, रेल मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री, शिक्षा मंत्री, कोयला मंत्री, सब चुनाव नहीं लड़ रहें है;

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लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार के कई मंत्री चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वे सीधे मैदान में विरोधी दलों के उम्मीदवारों से मुकाबिल होने की जगह पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में कैंपेनिंग करते ही नजर आ रहे हैं. इसमें कुछ मंत्री पिछले लोकसभा की जगह राज्यसभा कोटे से मंत्री बनते रहे हैं. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने ऐसे मंत्रियों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

शशि थरूर ने Tweet करते हुए कहा है-मोदी सरकार के विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, रेल मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री, शिक्षा मंत्री, कोयला मंत्री, सब चुनाव नहीं लड़ रहें है; लोकसभा स्पीकर चुनाव नहीं लड़ रही है; मार्गदर्शक मंडल चुनाव नहीं लड़ रहा है. पर लड़ कौन रहा है? निरहुआ यादव, सनी देओल, प्रज्ञा ठाकुर! इस प्रकार कांग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कई वरिष्ठ नेताओं की जगह अभिनेताओं और मालेगांव बम विस्फोट की आरोपी के चुनाव लड़ने पर बीजेपी पर निशाना भी साधा.

शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने अमेठी के अलावा वायनाड से भी राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) लड़ने पर कहा कि उनका फैसला दर्शाता है कि उन्हें उत्तर भारत और दक्षिण भारत, दोनों में जीत का भरोसा है. शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) में केरल या तमिलनाडु की किसी सीट से चुनाव लड़ने का साहस है? उन्होंने कहा कि केरल के वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से राहुल के चुनाव में खड़े होने के बाद दक्षिणी राज्यों में इस बात को लेकर ‘उत्साह साफ’ दिखाई दे रहा है कि अगला प्रधानमंत्री उनके क्षेत्र से निर्वाचित उम्मीदवार हो सकता है.

शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने मोदी और भाजपा के इस बयान को लेकर उनकी निंदा की कि राहुल गांधी ने बहुसंख्यक बहुल क्षेत्रों से ‘भागने’ के लिए वायनाड को चुना. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने कट्टरता फैलाने की बार-बार कोशिश की है. यह निराशाजनक है कि यह प्रधानमंत्री कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री को सभी भारतीयों का प्रधानमंत्री होना चाहिए लेकिन, भाजपा की कट्टरता के पथप्रदर्शक के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करके मोदी ने इस सिद्धांतवादी पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है.’

शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने दावा किया कि गांधी ने वायनाड से चुनाव लड़ने का फैसला ऐसे समय में किया है जब सहकारी संघवाद की भावना ‘अभूतपूर्व तनाव’ की स्थिति में है. इसी भावना ने 1947 में आजादी के बाद से देश को एकजुट बनाए रखा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार में दक्षिण की आर्थिक सुरक्षा और उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व के भविष्य को खतरे जैसे कई मामलों के कारण दक्षिणी राज्यों और संघीय सरकार के बीच संबंध ‘लगातार बिगड़े’ हैं.

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