Coronavirus: दुनिया मंदी की चपेट में, 2009 से भी बदतर होगी स्थिति: IMF Chief

कोरोना वायरस नाम की इस महामारी ने वैश्व‍िक अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल दिया है और विकासशील देशों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की आवश्यकता होगी.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) प्रमुख ने कहा है कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया मंदी (Recession) की चपेट में है और यह 2009 की मंदी से भी बुरा है.

IMF प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीएवा (Kristalina Georgieva) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस (Coronavirus) नाम की इस महामारी ने वैश्व‍िक अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल दिया है और विकासशील देशों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की आवश्यकता होगी.

एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि हम मंदी के दौर में प्रवेश कर चुके हैं 2009 में आए वैश्व‍िक वित्तीस संकट से भी बुरा होगा.

जॉर्जीएवा (Kristalina Georgieva) ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था के “अचानक रुक जाने” की एक प्रमुख चिंता दिवालिया होने और छंटनी की एक लहर है जो न केवल वसूली को कम कर सकती है बल्कि हमारे समाज के तानेबाने को नष्ट कर सकती है.

उभरते बाजारों के लिए, उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट के बारे में IMF के अनुमानों में लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर की वित्तीय जरूरत है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अनुमान नीचे की तरफ है. 80 से अधिक देशों ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से आपातकालीन सहायता का अनुरोध किया है.

IMF प्रमुख ने कहा कि हालांकि 2021 में मंदी से उबरना संभव है अगर वैश्व‍िक स्तर पर वायरस पर काबू पा लिया जाए.

उन्होंने कहा, “हम 2021 में एक रिकवरी का अनुमान लगा सकते हैं. वास्तव में, एक बड़ा परिवर्तन हो सकता है, लेकिन केवल तभी जब हम हर जगह वायरस को रोकने में सफल होते हैं नकदी की समस्याओं को दिवालियेपन का मुद्दा बनने से रोकते हैं.”

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