भारतीय इकोनॉमी बीते 6 सालों में सबसे बुरी हालत में, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जताई चिंता

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समाज में 'गहराती आशंकाओं' को दूर करने का आग्रह किया जिससे अर्थव्यवस्था को तेज करने में मदद मिल सके.

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh) ने देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की 4.5 प्रतिशत की वृद्धि दर को नाकाफी और चिंताजनक बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से समाज में ‘गहराती आशंकाओं’ को दूर करने और देश को फिर से एक सौहार्दपूर्ण और आपसी भरोसे वाला समाज बनाने का आग्रह किया जिससे अर्थव्यवस्था को तेज करने में मदद मिल सके.

अर्थव्यवस्था पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन में अपना विदाई भाषण देते हुए सिंह (Dr Manmohan Singh) ने कहा कि आपसी विश्वास हमारे सामाजिक लेनदेन का आधार है और इससे आर्थिक वृद्धि को मदद मिलती है. लेकिन ‘अब हमारे समाज में विश्वास, आत्मविश्वास का ताना-बाना टूट गया है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा समाज गहरे अविश्वास, भय और निराशा की भावना के विषाक्त संयोजन से ग्रस्त है.’ यह देश में आर्थिक गतिविधियों और वृद्धि को प्रभावित कर रहा है.

बता दें कि देश की आर्थिक वृद्धि में गिरावट का सिलसिला जारी है. विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 4.5 प्रतिशत पर रह गई है. यह छह साल का न्यूनतम स्तर है. एक साल पहले 2018-19 की इसी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत थी. वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5 प्रतिशत थी. वित्त वर्ष 2019-20 की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर का आंकड़ा 2012-13 की जनवरी-मार्च तिमाही के बाद से सबसे कम है. उस समय यह 4.3 प्रतिशत रही थी.

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक समेत कई एजेंसियों ने 2019-20 के लिये देश की आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को घटाया है. रिजर्व बैंक के अनुसार 2019-20 में यह 6.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि पूर्व में उसने इसके 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी थी. चीन की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 6 प्रतिशत रही जो 27 साल का न्यूनतम स्तर है. इस बीच, सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर में अक्टूबर महीने में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई. यह आर्थिक नरमी गहराने का संकेत है. आठ में से छह बुनियदी उद्योगों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गयी है.

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