रोजाना एक्‍सरसाइज और मेडिटेशन से दिमाग रहेगा दुरूस्‍त

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपनी फिटनेस पर ध्‍यान देने का मौका ही नहीं मिल पाता। ऑफिस और घर की जिम्‍मेदारियों में इंसान इतना उलझ जाता है कि वह खुद पर ध्‍यान दे ही नहीं पता। ऐसे में हमारी बॉडी काफी कमजोर होती जाती है और हमारी ज़िंदगी तनाव में चली जाती है। केवल 25 मिनट के लिए माइंडफुलनेस मेडिटेशन के साथ रोजाना हठ योग यानि आसन, प्राणायाम और ध्यान का एक संयोजन करने से मस्तिष्क तंत्र के क्रियान्वयन व ऊर्जा स्तर में काफी सुधार हो सकता है। नियमित तौर पर हठ योग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन (ध्यान की एक स्थिति) मस्तिष्क तंत्र के क्रियान्वयन, लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार से जुड़ी संज्ञानात्मक व भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमताओं, स्वाभाविक सोच की प्रक्रियाएं और क्रियाएं को बढ़ावा दे सकता है।

ध्यान इतना कोमल और नाजुक होता है कि इसे आप एक फूल की तरह मसलकर नष्ट कर दें। इसे कोई किसी दूसरे से नहीं सीखा जा सकता। हठ योग और दिमागी ध्यान दोनों ही के अभ्यास के बाद सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगते हैं। इससे लोग अपनी जिंदगी में जो करना चाहते हैं उस पर अधिक आसानी से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।” पश्चिमी देशों में योग की सबसे लोकप्रिय पद्धतियों में हठयोग शामिल है, जिसमें ध्यान करते हुए शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ सांसों का भी अभ्यास किया जाता है। दिमागी ध्यान तमाम तरह के विचारों, भावनाओं तथा बॉडी सेंसेशन को ऑब्जर्व करने का संयोजन है। शोध में शामिल लोग 25 मिनट तक दिमागी ध्यान और हठयोग करने के बाद रैंडमाइज्ड ऑर्डर में लिखे किसी चीज को पढ़ने में सफल रहे थे।

योग चिकित्सा पद्धति, जिसके द्वारा अनेक साध्य-असाध्य कहे जाने वाले रोगों का इलाज हो रहा है, वह भी हठयोग का ही अभ्यास है, क्योंकि हठयोग शरीर, प्राण, मन व इन्द्रियों को स्वस्थ बनाकर इनको रोगों से मुक्ति दिलाता है। योग की मान्यता है कि शरीर में कोई भी रोग शरीरस्थ प्राण के संचार की कमी से होता है, चाहे वह शरीर का रोग हो या मन का। और इसी प्राण के संचार को ठीक करने का कार्य हठयोग करता है।

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